बंगाल चुनाव: 15 मार्च के बाद छिड़ जाएगी आर-पार की राजनीतिक लड़ाई, प्रचार अभियान में आएगी तेजी
- ममता बनर्जी की शुरू करेंगी जनसभाओं में जाना
- प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री शाह, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी और केंद्रीय मंत्री करेंगे प्रचार
- राहुल-प्रियंका का असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु पर रहेगा जोर
- अधीर, वामदल, एसएफआई के भरोसे बंगाल में लड़ेगी कांग्रेस
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चुनाव आयोग सोमवार 15 मार्च को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। सोमवार से ही ममता बनर्जी पहले, दूसरे और तीसरे चरण को ध्यान में रखकर जनसभाएं आरंभ कर देंगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता और ममता सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी समेत अन्य नेता इसकी पूरी रणनीति तैयार कर चुके हैं।
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पश्चिम बंगाल में प्रचार का अगला चरण शुरू करने वाले हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह खुद पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार की रणनीति को अंतिम रूप दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जनसभाओं के कार्यक्रम भी आ चुके हैं। इसे देखते हुए तृणमूल के नेता कई रणनीतिक बदलाव की तैयारी में जुट गए हैं।
कुल मिलाकर भाजपा और तृणमूल के 15 मार्च से लेकर 2 मई तक का समय 'करो या मरो' जैसा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 मार्च को पुरुलिया, 20 को मिदनापुर (कंटाई), 21 को बांकुरा में जनसभा को संबोधित करेंगे। 24 मार्च को वह कांथी और इसके बाद 1 अप्रैल को मथुरापुर, उबरेलिया में पश्चिम बंगाल की जनता से 'आमरा आसोल पोरिबर्तन चाही' का आह्वान करेंगे। 16, 19 और 26 मार्च को गृहमंत्री शाह भी बंगाल में होंगे।
बंगाल के बजाय असम, पुडुचेरी, केरल, तमिलनाडु पर रहेगा कांग्रेस का फोकस
कांग्रेस पार्टी से मिली जानकारी के अनुसार, उसका मुख्य फोकस असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु में है। इनमें भी केरल, असम और पुडुचेरी में कांग्रेस पूरी ताकत लगा रही है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा चुनाव के अगले चरण में पार्टी को मजबूत बनाने जाएंगे। असम के प्रभारी भंवर जितेन्द्र सिंह ने असम कांग्रेस के सभी धड़ों के नेताओं को एक समीकरण में लाकर सफलता का रोड-मैप बनाया है।
महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव, सांसद गौरव गोगोई समेत सभी की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। बराक घाटी से लेकर पूरे असम में कांग्रेस को सफलता मिलने की संभावना बढ़ी है। इसके सामानांतर कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार पर अभी खास जोर नहीं लगाया है। 20 मार्च के बाद कांग्रेस इस तरफ ध्यान देगी। अभी पश्चिम बंगाल का प्रचार अभियान लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी, वामदलों के सहयोग और इंडियन सेक्युलर फ्रंट के सहयोग से चल रहा है।
भाजपा के जाल में न उलझने की है तृणमूल की रणनीति
तृणूमल के नेता और पूर्व सांसद विवेक गुप्ता कहते हैं कि बंगाल अपनी बेटी (ममता बनर्जी, बंगाली अस्मिता) को और उनके पिछले दस साल के काम को चुनेगा। भाजपा की यहां हिन्दू बनाम मुस्लिम, जय श्री राम या फिर छद्म राष्ट्रवाद की कोई दाल नहीं गलने वाली है। ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी तृणमूल की विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर आश्वस्त हैं। अभिषेक बनर्जी की टीम के सदस्य जयति घोष कहते हैं कि ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री मोदी की जनसभा से भाजपा को असलियत का संदेश मिल गया है।
घोष कहते हैं कि 12 मार्च को नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी ने नामांकन किया है। उन्होंने कहा कि सुवेंदु को जमीनी सच्चाई का आभास हो चुका है। कुल मिलाकर तृणमूल कांग्रेस की योजना भाजपा के आक्रामक प्रचार की शैली में न उलझने की है। विवेक गुप्ता का कहना है कि तृणमूल का कॉडर गांव-गांव तक फैला हुआ है। गांव-गांव के लोग सच्चाई को समझ रहे हैं। यहां भाजपा का झूठ नहीं चलेगा। बस उसकी कुछ सीटें बढ़ जाएंगी।
भाजपा से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, यूपी सीएम ही नहीं केंद्रीय मंत्री भी हैं लाइन में
महिला एवं बाल विकास मंत्री देबश्री चौधुरी लगातार पश्चिम बंगाल में प्रचार अभियान में डटी हैं। राज्य में पूरा प्रचार अभियान प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और पांच राज्यों के भाजपा संगठन मंत्रियों की देखरेख में चल रहा है। 12 मार्च को सुवेंदु का नामांकन कराने के लिए स्मृति ईरानी, पेट्रोलियम और रसायन मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान प्रधान भी वहां डटे रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केन्द्रीय रेल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक समेत अन्य ने बंगाल में चुनाव प्रचार की योजना को अंतिम रूप देना शुरू किया है।