फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Battle of Corona now in public hands, governments have no option but to open lockdown says experts

कोरोना की लड़ाई अब जनता के हाथ, सरकारों के पास लॉकडाउन खोलने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं  

Sun, 31 May 2020 09:38 PM IST
मुकेश कुमार झा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Sun, 31 May 2020 09:38 PM IST
सार

कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी देश के अलग-अलग हिस्सों में लॉक डाउन  में ढील देने की घोषणा हो चुकी है। इससे कोरोना के संक्रमण में विस्फोट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरे के बाद भी यह सही निर्णय है और सरकार के पास इसके आलावा और कोई विकल्प नहीं है।

विज्ञापन
Battle of Corona now in public hands, governments have no option but to open lockdown says experts
भारत में कोरोना वायरस लॉकडाउन - फोटो : PTI

विस्तार

कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी देश के अलग-अलग हिस्सों में लॉक डाउन  में ढील देने की घोषणा हो चुकी है। इससे कोरोना के संक्रमण में विस्फोट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरे के बाद भी यह सही निर्णय है और सरकार के पास इसके आलावा और कोई विकल्प नहीं है। सरकार और देश की जनता को देर-सबेर इस स्थिति का सामना करना ही था। ऐसे में और अधिक आर्थिक नुक्सान से बचते हुए बाज़ार खोलने का फैसला सही कहा जा सकता है। अब कोरोना के खतरे से निबटने की अंतिम जिम्मेदारी जनता के ऊपर रहेगी। उसकी सावधानी ही उसे इस संक्रमण से बचा सकती है।  

विज्ञापन


संजीवनी हॉस्पिटल के एमएस डॉक्टर अरविंद चोपड़ा ने अमर उजाला डॉट कॉम को बताया कि कोरोना से अंतिम लड़ाई जनता को ही लड़नी पड़ेगी। देर-सबेर इस स्थिति से हमारा सामना होना ही था और हमारे पास इसका सामना करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। लॉक डाउन से पहले हो या लॉक डाउन के बाद, कोरोना से संक्रमण का खतरा हमेशा बना हुआ था और यह आगे भी बना ही रहेगा। कोरोना से बचने का एकमात्र रास्ता शारीरिक दूरी बनाये रखना, फेस मास्क पहनना और समय-समय पर हाथ धुलते रहना है। यह अंतिम जिम्मेदारी जनता को ही निभानी पड़ेगी क्योंकि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
विज्ञापन


डॉक्टर अरविंद चोपड़ा के मुताबिक़ लॉक डाउन का लाभ केवल इतना ही हुआ है कि हमने कोरोना के फैलाव को कुछ दिन कम करके रखा और इस दौरान सरकारों ने अस्पतालों, आईसीयू और वेंटीलेटर जैसी सुविधाओं को बढ़ाया। लॉक डाउन का इससे अधिक कोई लाभ नहीं हुआ है। पिछला अनुभव बताता है कि लॉक डाउन के दौरान भी कोरोना संक्रमण के मामलों में वृद्धि होती रही है। ऐसे में अब लॉक डाउन को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बचा रह गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


डॉक्टर एन. राम कहते हैं कि लॉक डाउन खोलने से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ेंगे। लेकिन हम यह भी जान चुके हैं कि इसमें से दो-तीन फीसदी मामले ही ज्यादा गंभीर और जानलेवा होंगे। जबकि इससे बहुत बड़ी संख्या स्वस्थ होने वाले लोगों की है। अब जनता को ही इस मामले में समझदारी दिखानी पड़ेगी और समझदारी के साथ इसका सामना करना पड़ेगा।  


जनता नहीं दिखा रही जागरूकता
पूर्वी दिल्ली के एक एसडीएम स्तर के अधिकारी ने बताया कि लॉक डाउन के दौरान भी जनता की गतिविधयों पर पूर्ण रोक लगाना संभव नहीं हुआ। होम क्वारंटीन किये गये लोगों ने भी बार-बार नियमों की अवहेलना की और घर से बाहर निकले। इस दौरान एक हजार से अधिक लोगों के ऊपर होम क्वारंटीन नियमों के उल्लंघन के मामलों में केस भी हो चुका है। अधिकारी के मुताबिक़ लोगों की इस लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ा और तमाम प्रयास के बाद भी कोरोना को रोकना संभव नहीं हुआ। इस दौरान सामान्य लोगों के साथ-साथ पुलिस और स्वास्थ्यकर्मी भी कोरोना की चपेट में आते रहे हैं।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed