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बरेलवी उलमा भी तीन तलाक मसले पर हस्तक्षेप के खिलाफ
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 09 Oct 2016 04:30 AM IST
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दरगाह आला हजरत स्थित बरेली मरकज से जुड़े दो मजहबी संगठनों ने तीन तलाक की मुखालफत करने वालों का कड़ा विरोध करते हुए इसे पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप और संविधान के खिलाफ बताया है।
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टीटीएस के राष्ट्रीय महासचिव मुफ्ती सलीम नूरी का कहना है कि पूरा हिंदुस्तानी सुन्नी मुस्लिम समाज जो चार इमामों की पैरवी करता है और हनफी, शाफई, मालिकी और हंबली ऑडियोलॉजी को मानता है। वह एक बार में दी गयी तीन तलाकों को तीन ही मानता है इसमें किसी का न कोई मतभेद है और न ही कोई विरोधाभास है। इस्लाम और मुसलमानों के संबंध में जो लोग दुश्मनी की धारणा रखते हैं उनके उकसावे में आकर एक-दो महिलाओं का विरोध पूरी सुन्नी-मुस्लिम मुकल्लिद कम्युनिटी की आवाज न समझा जाये।
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इसी तरह दरगाह आला हजरत से जुड़े एक और संगठन आल इंडिया जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबउद्दीन रजवी ने कहा है कि तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के मांगे गए हल्फिया बयान पर केंद्र सरकार ने जो बयान दाखिल किया है वह मुस्लिम पर्सनल लॉ के बयान के खिलाफ है। हलफनामें में केंद्र सरकार ने महिलाओं के संबंध में जो बात कही है वो निराधार है। जो इस्लाम पर एक तरह से तोहमत लगाने जैसी बात है।
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