राजनीतिक दलों को भी देना पड़ सकता है 'नो ड्यूज सर्टिफिकेट'
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निकट भविष्य में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को ही नहीं बल्कि राजनीतिक दलों को भी चुनाव से पहले नो ड्यूज सर्टिफिकेट देना पड़ सकता है। इससे संबंधित दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के संदर्भ में चुनाव आयोग ने विभिन्न राजनैतिक दलों को पक्ष रखने के लिए कहा है। पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट के फैसले में किसी भी तरह का बकाया होने पर उम्मीदवारों पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध के अलावा राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते साल अगस्त महीने में चुनाव आयोग से कहा था कि वह सुनिश्चित करे कि बिजली, पानी और फोन का इस्तेमाल करने वाले उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र भरते समय इससे संबंधित एजेंसियों से किसी तरह का बकाया न होने संबंधी प्रमाण पेश करें।
हाईकोर्ट के इस फैसले के अध्ययन के बाद आयोग ने पाया कि इसी तरह का दिशा निर्देश राजनीतिक दलों के लिए भी है। क्योंकि सभी राष्ट्रीय पार्टियों के अलावा कई प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों को सरकारी मकान आवंटित किए गए हैं। चूंकि इन आवंटित मकानों में फोन, बिजली और पानी की आपूर्ति की जाती है। ऐसे में राजनैतिक दलों को भी इस दायरे में लाया जाना चाहिए। अध्ययन के बाद आयोग ने सभी राजनैतिक दलों को हाईकोर्ट के फैसले के संदर्भ में अपना पक्ष और विचार प्रस्तुत करने केलिए कहा है।
गौरतलब है कि चुनाव सुधार के लिए आयोग ने पहले ही कई तरह के प्रस्ताव कानून मंत्रालय को भेजे हैं। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने दागी और सजायाफ्ता लोगों के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसके अलावा आयोग ने कानून मंत्रालय के समक्ष मतों की गिनती का काम जल्द पूरा करने के लिए नए तौर तरीके अपनाने के सुझाव दिए थे।