कैशलेस लेन-देन के गुर सिखाने के लिए गांवों को गोद लेंगे बैंक
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कैशलेस ट्रांजेक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए बैंक अब गांवों को गोद लेंगे। सभी बैंक अपने-अपने कार्यक्षेत्र के व्यापारियों व दुकानदारों को कैशलेस ट्रांजेक्शन की जानकारी देने के लिए अभियान भी चलाएंगे।
कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय व बैंकों के बीच हुई बैठक में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बैंकों को ये सुझाव दिए। इस बैठक में विभिन्न बैंकों के 50 से अधिक नुमाइंदों ने शिरकत की थी। बैंकों से ग्राहकों के आधार नंबर को उनके खाते से जोड़ने के लिए भी कहा गया।
प्रसाद ने बैंकों से कहा कि जिन गांवों में कैशलेस ट्रांजेक्शन आरंभ हो गया है, उन गांवों को बैंकों की तरफ से संरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकों को क्लस्टर तरीके से गांवों को गोद लेना चाहिए ताकि गांवों को कैशलेस ट्रांजेक्शन के लायक बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि अगर बैंकों की एक शाखा 10 व्यापारियों को कैशलेस ट्रांजेक्शन की जानकारी देती है और उन्हें प्रशिक्षित करने का काम करती है तो देश भर में 20 लाख व्यापारियों को कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए प्रेरित किया जा सकता है। ग्रामीण इलाके में कैशलेस ट्रांजेक्शन के अभियान को चलाने के लिए सरकार के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का इस्तेमाल किया जा सकता है।
बैंकों को हेल्पलाइन नंबर जारी करने का भी निर्देश
बैंकों को हेल्पलाइन नंबर जारी करने का भी निर्देश
इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्रालय की तरफ से सभी बैंकों को हेल्पलाइन नंबर जारी करने के लिए कहा गया है ताकि लोग किसी प्रकार की दिक्कत होने पर उस नंबर का इस्तेमाल कर सकें।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि अनुसूचित जाति-जनजाति बहुल गांवों में बैंकर्स की तरफ से विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि उन्हें कैशलेस ट्रांजेक्शन की जानकारी दी जा सके।
प्रसाद ने कहा कि कैशलेस ट्रांजेक्शन के प्रोत्साहन अभियान में बेहतर काम करने वाले बैंकों को आरबीआई की तरफ से पुरस्कृत किया जाना चाहिए। बैंकों को कहा गया है कि वे मोबाइल के जरिए कैशलेस ट्रांजेक्शन के लिए यूपीआई व यूएसएसडी प्लेटफॉर्म पर खुद को लाएं।
पिछले 8 नवंबर को 500-1000 रुपये के नोटों के चलन में बंद होने की घोषणा के बाद सरकार कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के चौतरफा प्रयास कर रही है।