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Terrorists: भारत में यूं दी गई बांग्लादेश के अंसारुल्ला बांग्ला टीम के दहशतगर्दों को पनाह, कौन है रहमानी?

Thu, 28 Nov 2024 06:44 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 28 Nov 2024 06:44 PM IST
सार

Bangladesh: बता दें कि बांग्लादेश में अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी को अगस्त में रिहा किया था। कट्टरपंथी रहमानी की रिहाई भारत के लिए चिंता का विषय बताया गया था। रहमानी और उसके संगठन के सदस्यों पर आरोप है कि वह भारत में स्लीपर सेल की मदद से जिहादी गतिविधियां फैला रहा है।

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Bangladesh's Ansarullah Bangla Team terrorists are given shelter in India, who is Rahmani?
बांग्लादेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र में पहले से रह रहे बांग्लादेश के नागरिकों ने बांग्लादेश के आतंकी संगठन 'अंसारुल्लाह बांग्ला टीम' (एबीटी) के सदस्यों को पनाह दे दी। उनके फर्जी दस्तावेज, मसलन पैन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी भी तैयार करा दिए गए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी 'एनआईए' ने इस मामले का खुलासा किया। अब एनआईए की मुंबई कोर्ट ने तीन बांग्लादेशियों को एबीटी के आतंकवादियों को शरण देने के आरोप में पांच साल के लिए जेल भेज दिया है। इस मामले में कुल दोषसिद्धि की संख्या अब 5 हो गई है। 
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बता दें कि बांग्लादेश में अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के प्रमुख जशीमुद्दीन रहमानी को अगस्त में रिहा किया था। कट्टरपंथी रहमानी की रिहाई भारत के लिए चिंता का विषय बताया गया था। रहमानी और उसके संगठन के सदस्यों पर आरोप है कि वह भारत में स्लीपर सेल की मदद से जिहादी गतिविधियां फैला रहा है। बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से बाहर करने के बाद केयरटेकर सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने रहमानी को रिहा किया था। 
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राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत, मुंबई ने गुरुवार को तीन बांग्लादेशियों को पनाह देने के आरोप में पांच साल कैद की सजा सुनाई। पुणे में बांग्लादेश के अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (एबीटी) के आतंकवादी  मोहम्मद हबीबुर रहमान हबीब उर्फ राज जेसुब मंडल, हन्नान अनवर हुसैन खान उर्फ हन्नान बाबूराली गाजी और मोहम्मद अजरअली सुभानल्लाह उर्फ राजा जेसुब मंडल को संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। प्रत्येक को 2,000 रुपये जुर्माने के साथ 5 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। 
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इनके खिलाफ आईपीसी और विदेशी अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। इससे पहले दो अन्य आरोपी, जिनकी पहचान रिपेन हुसैन उर्फ रुबेल और मोहम्मद हसन अली मोहम्मद आमेर अली के रूप में की गई है, को भी दोषी ठहराया गया था। उन्हें अक्टूबर 2023 में एनआईए अदालत ने 5-5 साल कैद की सजा सुनाई थी। 

जांच एजेंसी के मुताबिक, यह मामला मूल रूप से मार्च 2018 में पुणे पुलिस द्वारा वैध दस्तावेजों के बिना पुणे में रहने वाले कई बांग्लादेशी नागरिकों और प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल कायदा के प्रमुख संगठन एबीटी के सदस्यों को बढ़ावा देने और सहायता करने के इनपुट के आधार पर दर्ज किया गया था। पुलिस ने हबीब को महाराष्ट्र के पुणे के धोबीघाट, भैरोबा नाला में पकड़ा था। बाद में इस केस की जांच के दौरान कुल पांच बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। 


गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिकों ने अवैध रूप से भारत में घुसपैठ की थी। उन्होंने फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराकर फर्जी नामों से पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड आदि धोखाधड़ी से हासिल कर लिए थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय सिम कार्ड हासिल करने, बैंक खाते खोलने और भारत में रोजगार तलाशने के लिए किया गया था। एनआईए की जांच में आगे पता चला है कि आरोपियों ने कई एबीटी कैडरों को शरण दी थी। उन्हें वित्त पोषित किया था, जिसमें एक प्रमुख सदस्य समद मिया उर्फ तनवीर उर्फ सैफुल उर्फ तुषार बिस्वास उर्फ तुसार भी शामिल था।
 
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