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ठाकरे परिवार में वसीयत का झगड़ा: जयदेव बोले, उद्धव ने धोखे से साइन कराए दस्तावेज

Tue, 19 Jul 2016 08:05 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 19 Jul 2016 08:05 PM IST
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Balasaheb had told me not to discuss the will with Uddhav Jaidev Thackeray
- फोटो : getty images
शिवसेना के दिवंगत नेता बाल ठाकरे की वसीयत को लेकर चल रहा झगड़ा अब सार्वजनिक हो गया है। जयदेव ठाकरे ने छोटे भाई उद्धव ठाकरे पर आरोप लगाया है ‌कि उन्होंने धोखे में रखकर बाल ठाकरे से दस्तावेज साइन करा लिए थे। पिता की संपत्ति में अधिकार के लिए जयदेव ठाकरे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में वसीयत को चुनौती दी है। सोमवार को वह इसी सिलसिले में अदालत में पेश भी हुए। 
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अंग्रेजी अखबार मिड-डे की खबर के अनुसार, कोर्ट में पेश किए गए हलफनामे में जयदेव ठाकरे ने दावा किया है कि बाल ठाकरे उन्हें बेदखल नहीं करना चाहते थे। अदालत में उद्धव के वकीलों ने जब जयदेव से पूछा कि यह बात उन्होंने उद्धव को क्यों नहीं बताई? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि बाल ठाकरे ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था। 
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'मुझे वसीयत के बारे में मीडिया से पता चला'

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जयदेव से उस आरोप के बारे में भी कोर्ट में सवाल पूछा गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उद्धव ने दस्तावेजों के बारे में जानकारी दिए बिना बाल ठाकरे से साइन करा लिए थे? इसके जवाब में जयदेव ने कहा कि जनवरी 2011 में बाल ठाकरे ने खुद उनसे यह बात कही थी।

कुछ महीने बाद अक्टूबर 2011 में बाल ठाकरे ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि वह उन्हें वसीयत में शामिल करेंगे। जयदेव ने कोर्ट में बताया कि दिसंबर 2012 में उन्हें मीडिया रिपोर्ट्स के माध्यम से पता चला कि उन्हें वसीयत में शामिल नहीं किया गया। इसके बाद 2013 में उन्होंने वसीयत को अदालत में चुनौती दी। 

 

अदालत ने पूछा, क्यों नहीं मातोश्री वापस लौटे?

Balasaheb had told me not to discuss the will with Uddhav Jaidev Thackeray
जयदेव ने यह भी दावा किया गया कि उन्होंने कई बार उद्धव ठाकरे से फोन और मैसेज के जरिए बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन उद्धव ने कभी जवाब नहीं दिया। जयदेव से अदालत में यह भी पूछा गया कि 1995 में मातोश्री छोड़ने के बाद वह वापस क्यों नहीं लौटे?

इसके जवाब में जयदेव ने कहा कि उन्होंने घर लौटने के बारे में बाल ठाकरे से पूछा था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। जयदेव ने कहा कि मातोश्री से उनके जाने के पीछे एक बड़ी पारिवारिक वजह थी, जिसके बारे में वह सार्वजनिक तौर से जिक्र नहीं करना चाहते हैं।  
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