बद्री ने आमिर की ख्वाहिशों पर पानी फेरा
- ओंकालेश्वर वार्ड के पूर्व पार्षद बद्री ने आमिर को जन्मदिन की दी बधाई।
- फिल्म स्टार के जज्बातों का किया सम्मान, बोले घर नहीं बेच सकता।
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फिल्म स्टार आमिर खां की मां जीनत हुसैन की जिस घर में कभी किलकारियां गूंजीं। जिस आंगन में उनकी मां ने गिरना, संभलना और पैरों पर चलना सीखा। बनारस में खंडहर बन चुकी वह ख्वाजा मंजिल सोमवार को सुर्खियों में आ गई।
असहिष्णुता के मुद्दे पर विरोधों का सामना कर रहे आमिर को अपने नाना की निशानी ख्वाजा मंजिल की याद अचानक उनकी फिल्म ‘दंगल’ के रिलीज होने से पहले आई है। 51वें जन्मदिन पर आमिर ने इस घर को खरीद कर अपनी मां जीनत हुसैन को तोहफे के रूप में भेंट करने की इच्छा जताई है लेकिन हालात बहुत बदल चुके हैं।
अब उनकी यह इच्छा पूरी हो पाएगी या नहीं, कहना जल्दबाजी होगी। इस मकान को 69 वर्ष पहले 1947 में नीलामी में लेने वाले चौथीराम के पुत्र पूर्व पार्षद बद्री गुप्ता ने इस घर को आमिर के हाथ बेचने से इंकार किया है।
ख्वाजा मंजिल को आमिर ने सात साल पहले तब ढूंढ निकाला था, जब वह वेश बदल कर फिल्म ‘थ्री इडियट’के प्रमोशन के लिए आए थे। तब टेंपो में सवार होकर वह अपने नानी के घर ख्वाजा मंजिल तक पहुंचे थे।
तब इसी मुहल्ले के नवाब कायम ने आमिर को ख्वाजा मंजिल का पता बताया था। जिन लोगों ने ख्वाजा मंजिल का आमिर को पता बताया था, उनको उन्होंने इनाम में सोने की अंगूठी बांटी थी। अब ख्वाजा मंजिल के मौजूदा सूरत-ए-हाल भी जान लीजिए।
1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तब आमिर के ननिहाल में रहने वालों में से कुछ लोग ख्वाजा मंजिल को छोड़ पाकिस्तान चले गए और कुछ मुंबई चले गए। उन्हीं दिनों हुई नीलामी में इस मकान को चौथीराम गुप्ता ने अपने बड़े भाई राजाराम के साथ मिलकर खरीद लिया।
नगर निगम के राजस्व अभिलेख के रिकार्ड में मकान ए -14/10, ए, बी, सी के रूप में दर्ज ख्वाजा मंजिल करीब छह बिस्वा में है। मौजूदा समय इस मकान का स्वामित्व पूर्व पार्षद बद्री गुप्ता और उनके चाचा के परिवारवालों के पास है। तीन बिस्वा में बद्री और शेष में उनके चाचा का परिवार रहता है।
जन्मदिन पर आमिर को दी बधाई
भाजपा के पूर्व पार्षद बद्री गुप्ता ने सोमवार की शाम 51 वें जन्मदिन पर आमिर की लंबी उम्र की कामना की। उन्होंने कहा कि ईश्वर उन्हें दीर्घायु करें, लेकिन मैं अपना घर नहीं बेचना चाहता।
बद्री का कहना है कि ननिहाल का पुश्तैनी मकान खरीद कर आमिर अपनी मां को तोहफे में देना चाहते हैं तो मैं उनकी इस भावना की कद्र करता हूं, लेकिन इस मकान को अब बेचना संभव नहीं है। इसमें मेरा परिवार रहता है। बद्री की पत्नी शकुंतला देवी ने भी ख्वाजा मंजिल को न बेचने का अपना इरादा जाहिर किया है।
ननिहाल का पता बताने वालों को बांटी थी सोने की अंगूठी
सात साल पहले फिल्म स्टार आमिर खां जब अपनी फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के प्रमोशन के लिए काशी आए थे तो ननिहाल का पुश्तैनी मकान खोजने में मददगार रहे चार लोगों को तोहफे में सोने की अंगूठी दी थी। बुजुर्ग नवाब साहब के अलावा आमिर ने लल्लन, जावेद और हसन रजा को अंगूठी गिफ्ट की थी। नवाब साहब और लल्लन इस दुनिया से रुखसत हो चुके हैं।
मुझे मां के लिए वाराणसी का उनका पुश्तैनी घर खरीदना है। जहां उन्होंने बचपन गुजारा है। मैं चाहता हूं कि जहां उन्होंने अपना बचपन गुजारा है, उस जगह का एक बार फिर अनुभव करें। मैं घर खरीदने की सोच रहा था और विचार कर रहा था कि काश, वहां (वाराणसी) रहने वाले लोगों से अनुरोध कर सकता... अगर बनारस में मेरा घर हो सके तो मुझे काफी खुशी होगी।
-आमिर खां, फिल्म अभिनेता