आयुष्मान भारत : रडार पर 15 हजार अस्पताल, आईटी विशेषज्ञ रख रहे नजर
- दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है आयुष्मान भारत
- योजना के तहत रोजाना भर्ती हो रहे औसतन 10 हजार लाभार्थी
- योजना में फ्रॉड रोकने को सरकार ने तैयार किया नया सिस्टम
- अब तक 6 लाख ऑपरेशन हुए, 700 करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान
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दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत के लिए अब देश के 15 हजार से ज्यादा अस्पताल सरकार की रडार पर हैं। इन अस्पतालों की ट्रैकिंग शुरू हो चुकी है। सितंबर में योजना लागू होने के बाद से हर दिन इन सरकारी और निजी अस्पतालों में करीब 10 हजार लाभार्थियों को भर्ती किया जा रहा है। दिल्ली से आईटी विशेषज्ञों की टीम अस्पतालों की ट्रैकिंग में लगी हुई है। किस अस्पताल में कौन से ऑपरेशन सर्वाधिक किए जा रहे हैं? किन अस्पतालों में इलाज देने के तरीके कैसे हैं? ये सब जानकारी केंद्र सरकार आईटी सॉफ्टवेयर के जरिए जुटाने में लगी है।
सूत्रों का कहना है कि 55 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को पांच लाख रुपये तक सालाना स्वास्थ्य लाभ देने वाली इस योजना में धांधली रोकने के लिए सरकार ने नया सिस्टम तैयार किया है। इंश्योरेंस के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उसके इलाज और ऑपरेशन तक की जानकारी हासिल कर रही है। 1350 से भी ज्यादा तरह की बीमारियों को कवर करने वाली इस योजना के जरिये 100 दिन में अब तक 6 लाख ऑपरेशन और 700 करोड़ रुपये के बिलों का भुगतान हो चुका है।
मंत्रालय के अनुसार, आयुष्मान योजना के तहत डिजिटल जांच और संतुलन प्रणाली को विकसित किया है, जिसके द्वारा अस्पताल में कौन सा ऑपरेशन अधिक हो रहा है, कौन से रोगी अधिक आ रहे हैं, वो जायज हैं या नहीं, इत्यादि की हर दिन जांच की जा रही है। पेपर और कैशलेस करने के पीछे कहीं न कहीं मकसद भी यही था।
निजी अस्पतालों को सुकून, बढ़ सकती हैं कीमतें
इसके अलावा देशभर के निजी अस्पतालों की मांग को देखते हुए सरकार फरवरी, 2019 में आयुष्मान भारत की समीक्षा बैठक कर सकती है। करीब एक साल पूरा होने पर बैठक में योजना से जुड़े कार्यों पर चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान योजना के तहत 1350 से भी ज्यादा बीमारियों के पैकेज की कीमतों को बढ़ाया जा सकता है। इनमें वृद्धि के बाद योजना से अस्पतालों के जुड़ने की प्रक्रिया में और भी ज्यादा तेजी आने की उम्मीद है।