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अयोध्या: मुस्लिम पक्षकारों की अपील पर इसी हफ्ते आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 24 Sep 2018 03:27 PM IST
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अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद का मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले से संबंधित एक पहलू को संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाए या नहीं इसे लेकर 28 सितंबर को फैसला आ सकता है। उच्चतम न्यायालय इस बात पर फैसला सुना सकता है कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा है या नहीं। इसपर फैसला आने के बाद ही असल मुद्दे पर निर्णय आने की संभावना है।
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अयोध्या आखिर किसकी जमीन है इसपर अभी सुनवाई होनी बाकी है। हालांकि इस मामले से जुड़े एक सीमित सवाल को संवैधानिक बेंच के पास भेजा जाए या नहीं इसपर फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। 1994 में इस्माइल फारुकी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने फैसला दिया था कि मस्जिद में नमाज पढ़ना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही राम जन्मभूमि में यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया गया था ताकि हिंदू धर्म के लोग वहां पूजा कर सकें।
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अब कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि इस निर्णय की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है या नहीं। मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि इस फैसले पर दोबारा परीक्षण किए जाने की जरूरत है। यही वजह है कि अब अदालत इस बात पर फैसला करेगी कि फैसले को दोबारा देखने के लिए संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं।
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बता दें कि 30 सितंबर 2010 को जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाया था। अपने आदेश में बेंच ने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि के तीन बराबर हिस्सा किए थे। राम मूर्ति वाले पहले हिस्से में राम लला को विराजमान कर दिया गया। राम चबूतरा और सीता रसोई वाले दूसरे हिस्से को निर्मोही अखाड़े को दिया गया और बाकी बचे हुए हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था।