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राम जन्मभूमि: बाबर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तक, साल-दर-साल जानें सैकड़ों साल पुराना विवाद
Sat, 03 Aug 2019 06:56 AM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Sat, 03 Aug 2019 06:56 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अयोध्या मामले पर सुनवाई करते हुए छह अगस्त से नियमित सुनवाई का फैसला दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि मध्यस्थता पैनल किसी भी नतीजे पर पहुंचने में असफल रहा है। जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक रोजाना इसकी सुनवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि मध्यस्थता का कोई नतीजा नहीं निकला। हफ्ते में तीन दिन नियमित सुनवाई की जाएगी। सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद इस बात की पूरी संभावना है कि अयोध्या भूमि विवाद पर 17 नवंबर से पहले फैसला आ जाए। दरअसल, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई चूंकि 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि इस मामले पर 17 नवंबर से पहले फैसला आ जाए।
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अयोध्या भूमि विवाद का इतिहास काफी पुराना रहा है। छह दिसंबर 1992 को विवादास्पद ढांचा गिराए जाने के सैकड़ों साल पहले से इसके विवाद की जड़ें गड़ी हुई है। आइए, जानतें हैं आखिर कब से शुरू हुई बाबरी विवाद की कहानी और इस पूरे विवाद में कब-कब, क्या-क्या हुआ!
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- 1528: अयोध्या में बाबर ने एक ऐसी जगह मस्जिद का निर्माण कराया जिसे हिंदू राम जन्म भूमि मानते हैं।
- 1853: हिंदुओं का आरोप- मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। पहला हिंदू-मुस्लिम संघर्ष हुआ।
- 1859: ब्रिटिश सरकार ने विवादित भूमि को बांटकर आंतरिक और बाहरी परिसर बनाए।
- 1885: राम के नाम पर इस साल कानूनी लड़ाई शुरू हुई। महंत रघुबर दास ने राम मंदिर निर्माण के लिए इजाजत मांगी।
- 1949: 23 दिसंबर को लगभग 50 हिंदुओं ने मस्जिद के केंद्रीय स्थल में भगवान राम की मूर्ति रखी।
- 1950: 16 जनवरी को एक अपील में मूर्ति को विवादित स्थल से हटाने से न्यायिक रोक की मांग।
- 1950: 5 दिसंबर को मस्जिद को ढांचा नाम दिया गया और राममूर्ति रखने के लिए केस किया।
- 1959: 17 दिसंबर को निर्मोही अखाड़ा विवाद में कूदा, विवादित स्थल के लिए मुकदमा दायर।
- 1961: 18 दिसंबर को सुन्नी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मालिकाना हक के लिए केस किया।
- 1984: विश्व हिंदू परिषद विशाल मंदिर निर्माण और मंदिर के ताले खोलने के लिए अभियान शुरू।
- 1986: 1 फरवरी फैजावाद जिला अदालत ने विवादित स्थल में हिंदुओं को पूजा की अनुमति दे दी।
- 1989: जून में भारतीय जनता पार्टी ने मंदिर आंदोलन में वीएचपी का समर्थन किया।
- 1989: 1 जुलाई को मामले में पांचवा मुकदमा दाखिल हुआ।
- 1989: नवंबर 9 को बाबरी के नजदीक शिलान्यास की परमीशन दी गई।
- 1990: 25 सितंबर को लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक रथ यात्रा की। जिसके बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए।
- 1990: नवंबर में आडवाणी गिरफ्तार। भाजपा ने वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
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- 1991: अक्टूबर में कल्याण सिंह सरकार ने विवादित क्षेत्र को कब्जे में ले लिया।
- 1992: 6 दिसंबर को कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद को ढहा दिया। एक अस्थाई मंदिर बनाया गया।
- 1992: 16 दिसंबर को तोड़फोड़ की जांज के लिए एस.एस. लिब्रहान आयोग का गठन हुआ।
- 2002: तत्कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेई ने विवाद सुलझाने के लिए अयोध्या विभाग शुरू किया।
- 2002: अप्रैल में विवादित स्थल पर मालिकाना हक के लिए हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई।
- 2003: मार्च से अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद विवादित स्थल पर खुदाई हुई और मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष के प्रमाण मिले।
- 2003: सितंबर में सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाने का फैसला दिया गया।
- 2005: जुलाई में विवादित क्षेत्र पर इस्लामिक आतंकवादियों का हमला, पांच आतंकी मारे गए।
- 2009: जुलाई में पीएम मनमोहन सिंह को को लिब्रहान आयोग ने रिपोर्ट सौंपी।
- 2010: 28 सितंबर को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की।
- 2010: 30 सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया।
- 2017: 21 मार्च सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मध्यस्थता की पेशकश की।
- 2017- 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में भाजपा और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।
- 2017- 1 दिसंबर को लगभग 32 नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के साल 2010 के फैसले को चुनौती दी।
- 2018- 8 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील पर सुनवाई शुरू कर दी।
- 2018- 20 जुलाई को मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
- 2018- 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनाई पर इनकार करते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया।
- 2018- 25 नवंबर को अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में धर्म सभा हुई। कहा गया कि बहुत जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण करना होगा और भाजपा पर आरोप लगाया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वजह से तारीख का एलान नहीं किया जा रहा है।
अयोध्या मसले को सुलझाने की कोशिश
- 2019- 1 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी ने 2019 के अपने पहले साक्षात्कार में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश पर फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है। राम मंदिर पर अध्यादेश लाने के बारे उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने दीजिए, इसके बाद जो भी सरकार की जिम्मेदारी होगी उसे पूरा किया जाएगा।
- 2019: 8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता और जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एनवी रमना, यूयू ललित और डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में मामले की सुनवाई के लिए पांच जजों की संविधान पीठ गठित की।
- 2019: 25 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ का पुनर्गठन किया। इसमें चीफ जस्टिस गोगोई और जस्टिस बोबड़े, चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एसए नाजेर शामिल थे।
- 2019: 29 जनवरी को केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए विवादित स्थल के आसपास की छह एकड़ अधिग्रहित जमीन को मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगी।
- 2019: 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की और मामले को सुलझाने के लिए पांच मार्च की तारीख तय की।
- 2019: 8 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व शीर्ष अदालत के न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाले पैनल द्वारा मध्यस्थता के लिए तय किया।
- 2019: 1 अगस्त को तीन-सदस्यीय मध्यस्थता पैनल ने सीलबंद लिफाफे में शीर्ष अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपी
- 2019: 2 अगस्त को रिपोर्ट पढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता को बेनतीजा बताया और छह अगस्त से नियमित सुनवाई करने का फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा कि जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक रोजाना इसकी सुनवाई की जाएगी।