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अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट से राम लला विराजमान ने कहा- नहीं चाहते मध्यस्थता

Mon, 30 Sep 2019 02:16 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 30 Sep 2019 02:16 PM IST
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Ayodhya Case Ram Lalla Virajman told SC that it does not want any kind of mediation
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

उच्चतम न्यायालय में सोमवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की लगातार 34वें दिन सुनवाई हुई। मामले के एक पक्षकार राम लला विराजमान ने आज अदालत से कहा कि वह इस मामले में किसी भी तरह की मध्यस्थता नहीं चाहते हैं। वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथ ने यह बात न्यायालय के पांच जजों की पीठ को बताई।

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यह स्पष्टीकरण ऐसे समय पर आया है जब शीर्ष अदालत ने मध्यस्थता पैनल को दो मुस्लिम पक्षों के अनुरोध पर भूमि विवाद को समझौते के जरिए निपटाने के लिए अपने प्रयासों को जारी रखने की अनुमति दी थी। मगर अदालत ने एक बार फिर दोहराया है कि सभी पक्ष अपनी दलीलें 18 अक्तूबर तक समाप्त कर लें। हालांकि अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि यह एक समानांतर प्रक्रिया होगी और पीठ अपनी सुनवाई को जारी रखेगी।
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2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाया था। जिसके खिलाफ शीर्ष अदालत मे 14 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। अदालत ने 2.77 अकड़ की भूमि को तीन पक्षों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बांट दिया था। पिछले महीने सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथ ने कहा था कि भगवान राम के जन्मस्थान पर संयुक्त कब्जा नहीं हो सकता क्योंकि जन्मस्थान स्वयं देवता हैं। उन्होंने तर्क देते हुए कहा था कि संयुक्त कब्जे से देवता का विभाजन होगा जो संभव नहीं है।

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