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अयोध्या-बाबरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आरएसएस, संतों और मौलानाओं की जुबानी, पढ़िए पूरी कहानी

Thu, 27 Sep 2018 07:57 PM IST
नई दिल्ली/सहारनपुर/रोहतक, अमर उजाला, नई दिल्ली
नई दिल्ली/सहारनपुर/रोहतक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 27 Sep 2018 07:57 PM IST
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ayodhya babri masjid dispute case : Read who said what
अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद (फाइल फोटो)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए अब अयोध्या मसले पर जल्द न्यायोचित फैसला आने की उम्मीद जताई है। संघ ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि शीर्ष अदालत ने राम जन्मभूमि मामले में 29 अक्टूबर से सुनवाई करने का निर्णय लिया है। हम आश्वस्त हैं कि इस मामले में जल्द उचित फैसला आएगा।

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फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने कहा कि हम आश्वस्त हैं कि न्यायपालिका अयोध्या मसले का तेजी से निपटारा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसके शीघ्र हल के खिलाफ थी और इस समस्या को जीवित रखना चाहती थी। तीन तलाक की तरह ही जज इस समस्या का भी हल निकालेंगे। इस फैसले से न्यायिक व्यवस्था में लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अयोध्या केस पर कोई असर नहीं पड़ेगा : मदनी  
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने सहारनपुर में कहा कि मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है उसका असर बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि केस पर नहीं पड़ेगा। क्योंकि अयोध्या विवाद मिल्कियत का मामला है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट 29 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। 
 

बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का मसला मालिकाना हक का है- मदनी

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madni - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस के पक्षकार मौलाना अरशद मदनी ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि का मसला मालिकाना हक का है। पूर्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आस्था को आधार बनाकर फैसला किया जिसको सुप्रीम कोर्ट ने कंडम कर दिया था।

इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग है या नहीं इस पर पुराने फैसले को बरकरार रखा जिसका कोई असर अयोध्या के मुकदमे पर नहीं पड़ेगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने 1994 के बयान को ही दोहराया है।

मौलाना मदनी ने अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा कि आज भी कुछ लोग अयोध्या में मंदिर मस्जिद को लेकर गलत बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि वहां मसला मंदिर या मस्जिद का नहीं बल्कि लड़ाई मालिकाना हक की है। मदनी ने कहा कि हमें पूरा यकीन है कि फैसला हमारे हक में आएगा। 

 

संसद में राम मंदिर की अनदेखी क्यों- तोगड़िया

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Pravin Togadia

हिसार जाते समय रोहतक में प्रवीण तोगड़िया ने कहा कि हम न्यायपालिका का सम्मान करते हैं लेकिन मंदिर बनाने का रास्ता संसद से निकलेगा। 32 साल से भारतीय जनता पार्टी वादा कर रही है कि पूर्ण बहुमत की सरकार आएगी तो मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून बनाएगी। ट्रिपल तलाक का अध्यादेश आ सकता है, जीएसटी का कानून बन सकता है तो राम मंदिर की अनदेखी क्यों।

आज के फैसले से हिंदुओं का कोई लेनादेना नहीं है, हम न्यायपालिका का सम्मान करते हुए स्पष्ट करते हैं कि केंद्र सरकार तत्काल राम मंदिर के लिए अध्यादेश लाए और बाद में कानून बनाकर हिंदुओं की मंदिर निर्माण की पूरी करे। पांच अक्टूबर को दिल्ली में मीटिंग है। संसद में अगर नरेंद्र मोदी की सरकार मंदिर निर्माण के लिए कानून नहीं बनानी है तो 21 अक्टूबर को लखनऊ से अयोध्या कूच कर संसद में कानून बनाने की अपनी मांग बुलंद करेंगे।

दिल्ली से संतों ने भरी राम मंदिर निर्माण की हुंकार

नई दिल्ली में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में आ रही बाधा पर संतों ने दिल्ली में मंथन किया। विश्व वेदांत संस्थान की अगुवाई में जुटे संतों ने एक स्वर से राम मंदिर का निर्माण जल्द कराने की मांग की। संतों ने प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति निवास की ओर कूच करने का प्रस्ताव भी पेश किया। कई संतों ने केंद्र इस मुद्दे पर सरकार के मौन धारण करने को लेकर भी सवाल उठाए। 

दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित कार्यक्रम में सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज काशी ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट कुछ मामलों में रात में अपना फैसला सुना सकता है तो राम मंदिर निर्माण के मामले में देरी क्यों कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भी अब विचार भी बदल रहा है। रामजन्म भूमि मामले में भी मोदी सरकार को अध्यादेश लाना होगा।

उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर तो सरकार चिंतित है, लेकिन राममंदिर निर्माण पर चुप है। संत समाज को प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति से उनके निवास स्थान पर जाकर मिलना होगा। स्वामी आनंद महाराज ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने धर्मांतरण को बढ़ावा देने का आरोप कांग्रेस पार्टी पर मढ़ा। 

महामंडलेश्वर नवल किशोर महाराज ने कहा कि संतों के चलते ही राष्ट्रभक्त व्यक्ति प्रधानमंत्री बना। अब वह निर्माण की तारीख बताए। जैन मुनी ने कहा कि सद्भावना के माहौल में मंदिर निर्माण होना चाहिए। स्वामी ज्योर्तिमयानंद सरस्वती ने कहा कि कथनी करनी को जब हम एक कर लेंगे तभी निर्माण संभव होगा।

फूलडोलजी महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मौनी बाबा हो गए है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मंदिर निर्माण नहीं हुआ तो 2019 आ रहा है। संत समागम में सांध्वी अनादी, सांध्वी विभ्रानंद गिरी, स्वामी विवेकानंद सरस्वती समेत कई संतों ने शिरकत की। इस मौके पर जेके सुदर्शन को विश्व वेदांत संस्थान का राष्ट्रीय अध्यक्ष व राघव को राष्ट्रीय संगठन मंत्री बनाने की घोषणा की गई।  

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