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विधानसभा चुनाव: इन दलों को साथ लेकर सरकार बना सकते हैं भाजपा-कांग्रेस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 10 Dec 2018 10:05 AM IST
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भाजपा-कांग्रेस
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मंगलवार 11 दिसंबर को विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। कल पता चल जाएगा कि किस राज्य में जनता ने सत्ता पर किस पार्टी को बिठाया है। जहां सभी दलों को अपनी-अपनी जीत का भरोसा है वहीं छोटी पर्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की महत्ता को दरकिनार नहीं किया जा सकता है। भाजपा और कांग्रेस सभी राज्यों में अपनी सरकार बनाने के सपने देख रहे हैं लेकिन अगर परिणाम सरकार बनाने लायक नहीं आते हैं तो वह अन्य पार्टियों को साथ लेकर चलने पर भी विचार कर रहे हैं।
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कर्नाटक में हुआ ड्रामा कांग्रेस और भाजपा के दिमाग में एकदम ताजा है। जहां भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं मिली थी। भाजपा को बहुमत के लिए केवल सात विधायकों की जरूरत थी जो उसे राज्य का सर्वेसर्वा बना देते मगर यह ताज उससे छिन गया और भाजपा-जदएस के गठबंधन ने सरकार बनाई। हालांकि गठबंधन के लिए क्षेत्रीय पार्टी ने मुख्यमंत्री पद की मांग की जिसे मान लिया गया। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव सीधे तौर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर जदएस की तरह अन्य क्षेत्रीय पार्टी अहम रोल निभा सकती हैं।
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मध्यप्रदेश में पिछले 15 सालों से भाजपा के पास सत्ता की चाबी है लेकिन एग्जिट पोल में उसे अस्पष्ट जनादेश मिला है। ऐसे में निर्दलीय, बसपा और गोंडवाना गोमंतक पार्टी के साथ की उसे जरूरत पड़ सकती है। छत्तीसगढ़ में बसपा और कांग्रेस ने अजीत जोगी की छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस को मजबूत किया है। यहां भी निर्दलीयों को अनदेखा नहीं किया जा सकता है। तेलंगाना में त्रिशंकु विधानसभा की परिस्थिति में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और भाजपा के लिए नतीजे काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। मिजोरम में यदि कांग्रेस या एमएनएस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो अल्पसंख्यकों से मदद लेनी पड़ेगी।
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हेमंत बिस्व शर्मा पूर्व कांग्रेसी नेता जो अब भाजपा के रणनीतिकार हैं उन्हें फायदा मिल सकता है यदि कांग्रेस यहां बहुमत हासिल करने में नाकामयाब रहती है। वहीं मुख्यमंत्री लाल थानवाला राजनीतिक खेल के खिलाड़ी हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि यदि राज्यों में त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति पैदा होती है तो वह गैर भाजपा पार्टियों के साथ गठबंधन करके वहां सरकार बना सकती है क्योंकि बहुत सी पार्टियां भाजपा के साथ हाथ नहीं मिलाएंगी।