सोशल मीडिया इंपैक्ट: पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर फेसबुक का गहरा असर
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पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव और आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर खूब हलचल दिख रही है। इसकी वजह है सोशल मीडिया पर युवाओं की सक्रियता। बड़ी संख्या में पहली बार वोट डालने वाले युवा इन चुनावों में सबसे बड़ी भूमिका निभाने जा रहे हैं। सोशल मीडिया खासकर फेसबुक पर इन युवाओं की सक्रियता बताती है कि यह प्लेटफॉर्म इन पर सबसे ज्यादा असर करता है। राजनीतिक दलों ने भी इसे बखूबी समझते हुए सोशल मीडिया विशेषकर फेसबुक पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। युवाओं को अपनी ओर खींचने का कोई मौका सियासी दल छोड़ नहीं रहे हैं।
14 करोड़ युवाओं पर नजर
हालिया स्टडी के मुताबिक फेसबुक पहली बार वोट डालने वाले युवाओं पर सबसे ज्यादा असर डालता है। 2019 में करीब 14 करोड़ युवा पहली बार वोट डालेंगे। यह इतनी बड़ी संख्या है जिसे कोई भी दल नजरअंदाज नहीं कर सकता। इनमें से करीब 7.5 करोड़ युवाओं के पास फेसबुक अकाउंट है। 2019 चुनाव को देखते हुए भारतीय यूजर्स में 18 से 22 की आयुवर्ग वाले 28 फीसदी युवा होंगे।
फेसबुक पर पुरुष यूजर्स की संख्या ज्यादा है और इनमें भी 30 साल से कम उम्र के वोटर शहरी इलाकों के हैं। जाहिर है इन्हें नजरअंदाज करने की गलती कोई नहीं कर सकता। इसी को देखते हुए राजनीतिक सोशल मीडिया पर अपनी रणनीति बना रहे हैं। हालांकि, फेसबुक के अलावा वॉट्सऐप और ट्विटर के जरिए भी प्रचार हो रहा है। लेकिन फेसबुक पर युवाओं की ज्यादा सक्रियता ने सियासी दलों को इस प्लेटफॉर्म पर ज्यादा सक्रिय कर दिया है।
करीब 27 करोड़ फेसबुक यूजर 18 से 65 साल की उम्र के बीच के हैं। ये संख्या मतदाताओं की कुल आबादी का 36 फीसदी है। गौर करने लायक बात ये है कि 63 फीसदी भारतीय यूजर 30 साल के कम उम्र के हैं। 56 फीसदी यूजर 20 से 24 साल की उम्र के हैं। 55 से 59 के बीच वाली उम्र के मतदाता 7 फीसदी हैं। 81 फीसदी यूजर 4 जी नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।
27 करोड़ फेसबुक यूजर्स 18 से 65 साल उम्र
63 फीसदी भारतीय यूजर 30 साल के कम उम्र के
56 फीसदी यूजर 20 से 24 साल की उम्र के
55 से 59 के बीच की उम्र के मतदाता 7 फीसदी
81 फीसदी यूजर्स करते हैं 4 जी नेटवर्क का इस्तेमाल
चुनाव आयोग की भी पैनी नजर
चुनाव में सोशल मीडिया की भूमिका किस कदर अहम हो चली है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव आयोग की भी इस पर पैनी नजर है। खासतौर पर सोशल पर फेक न्यूज को लेकर आयोग ने सोशल साइटों को सख्त निर्देश दिए हैं। खुद मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने भी फेक न्यूज से निपटने को सबसे बड़ी चुनौती करार दिया था। उन्होंने कहा था कि मतदाताओं को लालच देने के लिए अब बड़ी तकनीकी कंपनियों की मदद ली जा रही है।
कैंब्रिज एनालिटिका विवाद
चुनाव आयोग की चिंता की वजह यह भी है कि हाल के समय में फेसबुक को लेकर हुआ विवाद किसी से छुपा हुआ नहीं है। ब्रिटिश कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका इसे लेकर विवादों में घिर चुकी है। उस पर आरोप लगा कि वह यूजर्स की निजी जानकारियों का इस्तेमाल चुनावों में करता आ रहा है। इस कंपनी ने फेसबुक से 8.7 करोड़ लोगों का प्रोफाइल डाटा लीक कर कई देशों के चुनाव परिणाम प्रभावित किया। फेसबुक ने इस साल अप्रैल में 5.62 लाख भारतीय लोगों के डाटा लीक होने की बात स्वीकार की थी। कंपनी की तरफ से इसमें कैंब्रिज एनाटलिटिका का नाम ही लिया गया था। फेसबुक ने कहा था कि ब्रिटिश कंपनी ने इसके लिए उनकी सहमति नहीं ली।
मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि भारत सरकार को इसमें दखल देना पड़ा। अगस्त 2018 में सीबीआई ने इस मामले में जांच भी शुरू की। इस मामने ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं। विवाद के चलते इस कंपनी के सीईओ को इस्तीफा देना पड़ा और फिर कंपनी ने अपना कारोबार समेटने का भी एलान किया। वहीं, इस मामले में फेसबुक के मार्क जकरबर्ग ने यूजर्स से माफी भी मांगी थी।