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Assam: अतिक्रमण हटाने के दौरान गोलीबारी का मामला, DGP ने मौके पर पहुंचकर हालात का लिया जायजा

Fri, 13 Sep 2024 04:03 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 13 Sep 2024 04:03 PM IST
सार

असम के डीजीपी जीपी सिंह ने शुक्रवार को कामरुप जिले के कोचुटोली गांव का दौरा किया। जहां कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए बवाल में पुलिस की गोली लगने से दो लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए हैं।

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Assam eviction drive: DGP visits area to review situation
असम में अतिक्रमण हटाने के दौरान बवाल - फोटो : ANI

विस्तार

असम के कामरुप जिले के कोचुटोली गांव में कथित तौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए बवाल के बाद राज्य के डीजीपी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। इसके बाद स्थिति की समीक्षा और पुलिसकर्मियों की तैनाती के बाद डीजीपी ने बताया कि गुरुवार को पुलिस पर ग्रामीणों की तरफ से किया गया हमला एक खास वर्ग की तरफ से 'साजिश' होने का संदेह है, क्योंकि सोमवार से ये अभियान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था।
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पुलिस को मजबूरन गोली चलानी पड़ी- DGP
DGP ने मामले में आगे कहा कि अतिक्रमण हटाने का काम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन गुरुवार को एक खास वर्ग ने पुलिस पर धारदार हथियारों से हमला करना शुरू कर दिया। जिसके बाद पुलिस को मजबूरन गोली चलानी पड़ी, जिससे दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 22 पुलिसकर्मी और 11 ग्रामीण घायल हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिला पुलिस और रेलवे पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, क्योंकि 'हमें साजिश का संदेह है और हमले की घटना को उकसाया गया है। वहीं ये पूछे जाने पर कि अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं, डीजीपी ने कहा कि पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। 
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सीएम सरमा ने कांग्रेस पर साधा निशाना
इस बीच, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि ये अभियान जारी रहेगा, क्योंकि लोग आदिवासी बेल्ट की जमीन पर अवैध रूप से बसे हुए हैं, जो कुछ जनजातियों और संरक्षित वर्गों के लिए आरक्षित है। सरमा ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम से इतर कहा, कांग्रेस ने घोषणा की थी कि जमीन आदिवासियों के लिए आरक्षित है, लेकिन अब जब हम अवैध रूप से बसे लोगों की तरफ से कब्जा की गई जमीन को खाली करा रहे हैं, तो वे ही लोगों को ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के लिए उकसा रहे हैं।
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पहले से सभी को दी गई थी सूचना- DGP
वहीं डीजीपी जीपी सिंह ने कहा, अगस्त के आखिरी हफ्ते से हम सार्वजनिक सूचना के जरिए घोषणा कर रहे हैं कि ग्रामीणों को जगह खाली कर देनी चाहिए और उनमें से कई लोग अपने सामान के साथ चले भी गए हैं। डीजीपी ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से इलाके में अवैध निर्माण देखा गया और मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया, जिसके बाद हमें यह पता लगाने का निर्देश दिया गया कि बसने वाले कौन थे।


'यहां पर केवल आदिवासी लोग ही रह सकते हैं'
उन्होंने कहा कि हमने जमीन की स्थिति का पता लगाने के लिए जिला अधिकारियों के साथ समन्वय किया और हमें बताया गया कि इसे 1950 में असम भूमि विनियमन अधिनियम, 1886 के अनुसार आदिवासी बेल्ट घोषित किया गया था, जहां केवल आदिवासी और कुछ संरक्षित वर्ग के लोग ही रह सकते थे। डीजीपी ने कहा कि हाल ही में किए गए सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि इलाके में रहने वाले लोगों का एक नया वर्ग संरक्षित वर्ग से संबंधित नहीं है और सरकार ने कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

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