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जम्मू-कश्मीर में लोगों की हाईकोर्ट से संपर्क करने में असमर्थता संबंधी दावा सही नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Fri, 20 Sep 2019 11:21 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Fri, 20 Sep 2019 11:21 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने आज जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने से जुड़े कई मामलों में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि उसे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मिली है जो जम्मू-कश्मीर में लोगों के हाईकोर्ट से संपर्क करने में असमर्थ होने संबंधी दावे का समर्थन नहीं करती।
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कश्मीर में बच्चों को कथित तौर पर हिरासत में रखे जाने का आरोप लगाने वाले बाल अधिकार कार्यकर्ता इनाक्षी गांगुली और शांता सिन्हा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने 16 सितंबर को शीर्ष अदालत को बताया था कि घाटी के लोग वहां हाईकोर्ट से संपर्क नहीं साध पा रहे हैं। इसके बाद पीठ ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश से इस बारे में रिपोर्ट मांगी थी।
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न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस ए नजीर ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा कि हमें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रिपोर्ट मिली है जो उस दावे का समर्थन नहीं करती जिसमें कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर में लोग हाईकोर्ट से संपर्क करने में असमर्थ हैं।
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि वह कश्मीर में बच्चों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाने संबंधी याचिका पर सुनवाई करेगी क्योंकि याचिका में नाबालिगों से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय ने कश्मीर में बच्चों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को भी कहा।
दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें राज्य से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद पांच लोगों को हिरासत में लेने को चुनौती दी गई थी।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया। याचिका में प्राधिकारियों को जम्मू-कश्मीर में लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देने वाले कानून के प्रावधानों को चुनौती दी गई है।
पीठ ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
तीसरे मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्ति के मामले में केंद्र को नोटिस जारी किया है। यह याचिका आसिफा मुबीन ने दायर की थी। कोर्ट ने केंद्र से दो सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा है।
Supreme Court issues notice to Centre and seeks a detailed reply within 2 weeks on a habeus corpus petition filed by one, Asifa Mubeen, whose husband was allegedly detained under PSA (Public Safety Act) in Jammu and Kashmir after the Abrogation of Article 370 . pic.twitter.com/Vc0dmOhntd
— ANI (@ANI) September 20, 2019