फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Army starts induction of control, reporting systems under 'Project Akashteer': Sources

Project Akashteer: भारतीय सेना को मिली आकाशतीर प्रणाली, जमीन से लेकर हवा तक सीमा की हिफाजत करना होगा आसान

Thu, 04 Apr 2024 09:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 04 Apr 2024 09:58 PM IST
सार

Project Akashteer: आकाशतीर एक स्वचालित वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली है। इसमें सेंसर व रडार का नेटवर्क है, जो दुश्मन के विमान, जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन व मिसाइलों के बारे में तुरंत अलर्ट जारी करते हैं।

विज्ञापन
Army starts induction of control, reporting systems under 'Project Akashteer': Sources
आकाशतीर प्रणाली - फोटो : एक्स/भारतीय सेना

विस्तार

भारतीय सेना की वायु रक्षा कोर को गुरुवार को आकाशतीर परियोजना के तहत कमांड और कंट्रोल सिस्टम मिला। इस प्रणाली की मदद से देश की जमीन से लेकर आसमान तक की हिफाजत सेना के लिए आसान हो जाएगी। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने विकसित किया है। रक्षा मंत्रालय ने पिछले बीईएल के साथ इस प्रणाली के विकास के लिए 1982 करोड़ रुपये का समझौता किया था। सूत्रों ने यह जानकारी दी। 

विज्ञापन

यह एक स्वचालित वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली है। इसमें सेंसर व रडार का नेटवर्क है, जो दुश्मन के विमान, जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन व मिसाइलों के बारे में तुरंत अलर्ट जारी करते हैं। इसके अलावा इस प्रणाली से मिले अलर्ट के आधार पर जमीन से हवा और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और रॉकेट्स को जोड़ा जा सकता है। इसके अलर्ट सेना और वायुसेना दोनों को मिलते हैं, जिससे दुश्मन के हमले के खिलाफ त्वरित प्रतिक्रिया देना आसान हो जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

आकाशतीर प्रणाली खासतौर पर समय कम ऊंचाई वाले इलाकों में हवाई जोखिमों की निगरानी को आसान बनाती है। आकाशतीर के संचालन के लिए भारतीय सेना का अपना सैटेलाइट काम करता है। इसे भारतीय सेना के भविष्य के इंटिग्रेटेड वॉर रूम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका इस्तेमाल तीनों सेनाएं मिलकर करेंगी। इस प्रणाली में जमीन पर भारतीय सेना और वायुसेना के रडार्स तैनात किए गए हैं। यह प्रणाली खासतौर पर सेना को वायुसेना से जोड़ने में मददगार होगी, क्योंकि वायुसेना के पास तो पहले से ही इस तरह का नेटवर्क एएफनेट है। इस प्रणाली के तहत सेना अलर्ट मिलते ही दुश्मन निशाने पर जमीन से हमला करेगी, अगर यह हमला असफल रहा, तो वायु सेना तुरंत मोर्चा संभाल लेगी।

विज्ञापन

इसके अलावा इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि युद्ध की स्थिति में यह प्रणाली सेना को अपनी ही वायु सेना के विमानों व मिसाइलों को गलती से निशाना बनाने से बचाने में मददगार साबित होगी। इसके अलावा विवादित हवाई क्षेत्र में मित्रवत विमानों की सुरक्षा भी इसके जरिये की जा सकेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed