Project Akashteer: भारतीय सेना को मिली आकाशतीर प्रणाली, जमीन से लेकर हवा तक सीमा की हिफाजत करना होगा आसान
Project Akashteer: आकाशतीर एक स्वचालित वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली है। इसमें सेंसर व रडार का नेटवर्क है, जो दुश्मन के विमान, जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन व मिसाइलों के बारे में तुरंत अलर्ट जारी करते हैं।
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भारतीय सेना की वायु रक्षा कोर को गुरुवार को आकाशतीर परियोजना के तहत कमांड और कंट्रोल सिस्टम मिला। इस प्रणाली की मदद से देश की जमीन से लेकर आसमान तक की हिफाजत सेना के लिए आसान हो जाएगी। इसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) ने विकसित किया है। रक्षा मंत्रालय ने पिछले बीईएल के साथ इस प्रणाली के विकास के लिए 1982 करोड़ रुपये का समझौता किया था। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
यह एक स्वचालित वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली है। इसमें सेंसर व रडार का नेटवर्क है, जो दुश्मन के विमान, जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन व मिसाइलों के बारे में तुरंत अलर्ट जारी करते हैं। इसके अलावा इस प्रणाली से मिले अलर्ट के आधार पर जमीन से हवा और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और रॉकेट्स को जोड़ा जा सकता है। इसके अलर्ट सेना और वायुसेना दोनों को मिलते हैं, जिससे दुश्मन के हमले के खिलाफ त्वरित प्रतिक्रिया देना आसान हो जाता है।
The first batch of Control Centres for the Automated Air Defence Control and Reporting System, ‘Project #Akashteer’ were flagged off today from Bharat Electronics Limited #BEL, Ghaziabad. This is a significant induction in developing indigenous capabilities for automation of Air… pic.twitter.com/TIk8jmsXF3
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) April 4, 2024
आकाशतीर प्रणाली खासतौर पर समय कम ऊंचाई वाले इलाकों में हवाई जोखिमों की निगरानी को आसान बनाती है। आकाशतीर के संचालन के लिए भारतीय सेना का अपना सैटेलाइट काम करता है। इसे भारतीय सेना के भविष्य के इंटिग्रेटेड वॉर रूम का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका इस्तेमाल तीनों सेनाएं मिलकर करेंगी। इस प्रणाली में जमीन पर भारतीय सेना और वायुसेना के रडार्स तैनात किए गए हैं। यह प्रणाली खासतौर पर सेना को वायुसेना से जोड़ने में मददगार होगी, क्योंकि वायुसेना के पास तो पहले से ही इस तरह का नेटवर्क एएफनेट है। इस प्रणाली के तहत सेना अलर्ट मिलते ही दुश्मन निशाने पर जमीन से हमला करेगी, अगर यह हमला असफल रहा, तो वायु सेना तुरंत मोर्चा संभाल लेगी।
इसके अलावा इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि युद्ध की स्थिति में यह प्रणाली सेना को अपनी ही वायु सेना के विमानों व मिसाइलों को गलती से निशाना बनाने से बचाने में मददगार साबित होगी। इसके अलावा विवादित हवाई क्षेत्र में मित्रवत विमानों की सुरक्षा भी इसके जरिये की जा सकेगी।