ऐसे ही नहीं मिल जाएगी भारत की नागरिकता, नियमों के तहत करना होगा आवेदन
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नागरिकता कानून के अस्तित्व में आने के बाद देशभर में कई जगहों पर विरोध-प्रदर्शन के बीच इसे लेकर गृह मंत्रालय नए नियम तैयार करने में जुट गया है। गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, नागरिकता संशोधन अधिनियम से कितने लोग लाभान्वित होंगे इसकी संख्या अभी निर्धारित नहीं की गई है। इनकी संख्या नियमों के निर्धारण के बाद स्पष्ट होगी। इसके लिए जल्द ही नियम तैयार किए जाएंगे।
साथ ही भारतीय नागरिकता प्राप्त करने वाले आवेदक को आवश्यक दस्तावेजों के साथ नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा। कोई भी व्यक्ति अपने आप ही भारतीय नागरिक नहीं बन जाएगा।
MHA sources: Number of people who will be benefited by #CitizenshipAmendmentAct will be clear after framing of rules; Rules to be framed soon. https://t.co/X2hGlSxKIb
— ANI (@ANI) December 16, 2019
भ्रांतियों को दूर करना चाहता है गृह मंत्रालय
सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय नागरिकता कानून पर फैली भ्रांतियों को दूर करना चाहता है। अधिकारियों का कहना है कि ये साफ है कि लंबे समय से भारत में रह रहे लोगों को ही नागरिकता मिलेगी। 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आने वालों को ही नागरिकता मिलेगी। लेकिन इसके लिए आवेदन करना होगा। उत्तर पूर्व के किसी भी नागरिक को इससे भयभीत जरूरत नहीं है क्योंकि यहां शेड्यूल 6 और आईएलपी पहले से ही लागू है।
बाहर का कोई नागरिक ये कैसे साबित करेगा कि वह धार्मिक प्रताड़ना का शिकार है, सूत्र बताते हैं कि इस संबंध में एक कमेटी का गठन हो रहा है जो बताएगी कि इस संबंध में किस तरह के दस्तावेजों की जरूरत होगी।
नागरिकता कानून का विरोध
बता दें कि नागरिकता कानून के विरोध में असम, प. बंगाल में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। रविवार को दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया और उत्तर प्रदेश की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी हिंसक प्रदर्शन हुए। इसके बाद से दूसरे कई शहरों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया है। साथ ही यह मामला सोमवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत इसपर मंगलवार को सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है।