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Hindi News ›   rajpath ›   Apna Dal situation in UP election 2017

छोटा सा अपना दल और नखरे हजार

Tue, 24 Jan 2017 02:54 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
शशिधर पाठक/नई दिल्ली Updated Tue, 24 Jan 2017 02:54 PM IST
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Apna Dal situation in UP election 2017

स्व. सोने लाल पटेल का अपना दल उ.प्र. में कभी बड़ा राजनीति का केंद्र नहीं बन सका। पहली बार अपना दल के दो सांसद (केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, सोने लाल की बेटी और कुंवर हरिबंश सिंह) संसद भवन में पहुंचे हैं, लेकिन दल के नखरे हजार हैं। कुंवर हरिबंश सिंह अनुप्रिया पटेल की मां के साथ हैं। उनका कहना है कि भाजपा को दल की ताकत ध्यान में रखकर करीब 20 सीटें देनी चाहिए।

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हरिबंश सिंह का कहना है कि कानपुर से लेकर मिर्जापुर, प्रतापगढ़, रायबरेली, इलाहाबाद, वाराणसी और उ.प्र. के कई जिलों में अपनादल का प्रभाव है। इसे ध्यान में रखकर भाजपा को कम से कम 20 सीटें देनी चाहिए। हरिबंश सिंह अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल के साथ हैं। कृष्णा पटेल स्व. सोनेलाल की विधवा हैं और उनका दावा है कि असली अपना दल का प्रतिनिधित्व वही करती हैं।
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मां -बेटी में है विवाद
कृष्णा पटेल ने बेटी और सांसद तथा केन्द्र सरकार में मंत्री अनुप्रिया पटेल को 1995 में ही पार्टी से निकाल दिया था। अनुप्रिया पटेल पार्टी की महासचिव थी। बाद में पिछले मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री ने अनुप्रिया पटेल को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में राज्यमंत्री बना दिया। अनुप्रिया पटेल पूरी तरह से भाजपा के साथ हैं। कुंवर हरिबंश सिंह का कहना है कि मां-बेटी को एक हो जाना चाहिए। इसी में अपना दल की भी भलाई है।
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दोनों प्रत्याशी अलग चिन्ह पर लड़े चुनाव
2014 के अपना चुनाव में अपना दल को भाजपा से मिली सीटों पर चुनाव जीतकर आए दोनों सांसद अलग-अलग चुनाव चिन्ह से विजयी हुए थे। कुंवर हरिबंश सिंह को चुनाव चिन्ह कैंची मिला था। वहीं अनुप्रिया पटेल कप प्लेट चुनाव चिन्ह पर लड़ी थी। कुंवर हरिबंश सिंह का कहना है कि दरअसल पार्टी के पास कोई अधिकृत चुनाव चिन्ह नहीं था। इसलिए लोकसभा में मान्यता भी निर्दल सांसद के रूप में है।

अपना दल का इतिहास और भाजपा का दांव

Apna Dal situation in UP election 2017

कुंवर हरिवंश सिंह
कुंवर हरिवंश सिंह अपना दल के सांसद हैं। इसके साथ ही वो कृष्णा पटेल के गुट के हैं। हरिबंश सिंह बड़ी बारीक राजनीति करते हैं। प्रतापगढ़ में अपनी क्षमता तथा अपना दल के जनाधार का साथ पाकर कांग्रेस की प्रत्याशी राजकुमारी रत्ना सिंह समेत अन्य को उन्होंने चित कर दिया था। कृष्णा पटेल के बाद अपना दल में हरिबंश सिंह अपना एक अलग प्रभाव रखते हैं।

अपना दल का इतिहास
1995 में सोनेलाल पटेल ने यह पार्टी बनाई थी। यह पार्टी कुर्मी मतदाताओं पर पकड़ रखती है और प्रदेश में 4-5 प्रतिशत के करीब कुर्मी हैं। कृष्णा पटेल इस समय पार्टी की अध्यक्ष हैं। बड़ी बेटी पल्लवी पटेल राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। अनुप्रिया पटेल सोने लाल पटेल की छोटी बेटी हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा रही अनुप्रिया पार्टी की उ.प्र. में विधायक रही थीं। अब मिर्जापुर की लोकसभा सीट से सांसद हैं, लेकिन मां बेटी के बीच में पटती नहीं है। कृष्णा पटेल ने अनुप्रिया को पार्टी से निकाल दिया है।

भाजपा का दांव
भाजपा अनुप्रिया पटेल के साथ खड़ी है। वह न केवल केंद्र सरकार में मंत्री हैं बल्कि भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार भी करेंगी। इस तरह से भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर, स्वामी प्रसाद मौर्य को पार्टी में  शामिल कराकर अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को संदेश दे दिया है।

माना जा रहा है कि ऐसे में पार्टी कृष्णा पटेल के नेतृत्व वाली अपना दल को महत्व नहीं देगी। अनुप्रिया पटेल वैसे भी कुशल वक्ता हैं और माना जा रहा है कि वह भाजपा के पक्ष में कुर्मी मतदाताओं को रिझाने में सफल रहेंगी।

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