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अपर्णा पांडे: भारतीय नौकरशाह यथास्थिति में ही उलझे हैं
एजेंसी, वाशिंगटन
Updated Sat, 29 Jul 2017 02:46 AM IST
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Arpana Pandey
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एक भारतीय-अमेरिकी लेखिका की नई किताब के मुताबिक ब्रिटिश शासकों द्वारा अपने औपनिवेशिक उद्यमों को कायम रखने के लिए तैयार की गई नौकरशाही और संस्थाएं नई व्यवस्था में भारत की प्रतिष्ठा को बहाल करने में चुनौती पेश कर रही हैं।
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वाशिंगटन डीसी स्थित अपर्णा पांडे ने अपनी नई किताब, ‘फ्रॉम चाणक्य टू मोदी : द इवोल्यूशन ऑफ इंडियाज फॉरन पॉलिसी’ में कहा है, ‘भारतीय नौकरशाह यथास्थिति में उलझे हैं वह भी तब जब भारत के लोग 21वीं सदी में नई वैश्विक व्यवस्था के तहत प्रवेश करना चाहते हैं।’
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एक सर्वोच्च अमेरिकी थिंक टैंक हडसन इंस्टीट्यूट से जुड़ी पांडे ने लिखा कि 2014 में अपने चुनाव के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नया नजरिया व्यक्त किया, चीजों को बदलने की इच्छा दिखाई और ऐसा नेटवर्क बना रहे हैं जो यह बदलाव ला सकता है।
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उन्होंने लिखा, ‘लेकिन सिविल सेवा और सशस्त्र बलों जैसी ब्रिटिशों द्वारा तैयार की गई शासन संस्थाएं पहले से तय मानकों के मुताबिक सोचने के लिए ही प्रशिक्षित हैं। नेहरू से लेकर मोदी तक नेताओं ने भारत की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित करने का वादा किया था।’ उन्होंने कहा कि भारत हर मायने में एक बेहद महत्वपूर्ण देश है।