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साफ हवा और शुद्ध पानी की लड़ाई लड़ने वाले पर्यावरणविद अनुपम मिश्र नहीं रहे

Mon, 19 Dec 2016 01:10 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Mon, 19 Dec 2016 01:10 PM IST
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Anupam Mishra dead at 68
अनुपम मिश्र

जाने-माने गांधीवादी, पत्रकार, पर्यावरणविद् और जल संरक्षण के लिए अपना पूरा जीवन लगाने वाले अनुपम मिश्र का सोमवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वो 68 बरस के थे। मिश्र का अंतिम संस्कार आज दोपहर दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया जाएगा। हिंदी के दिग्गज कवि और लेखक भवानी प्रसाद मिश्र के बेटे अनुपम बीते एक बरस से प्रोस्टेट कैंसर से जूझ रहे थे।

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विकास की तरफ बेहताशा दौड़ते समाज को कुदरत की कीमत समझाने वाले अनुपम ने देश भर के गांवों का दौरा कर रेन वाटर हारवेस्टिंग के गुर सिखाए। 'आज भी खरे हैं तालाब', 'राजस्थान की रजत बूंदें' जैसी उनकी लिखी किताबें जल संरक्षण की दुनिया में मील के पत्थर की तरह हैं। साल 1996 में मिश्र को इंदिरा गांघी पर्यावरण पुरस्कार से भी नवाज़ा गया।
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अनुपम मिश्र की विदाई से लोग शोक-संतप्त हैं और सोशल मीडिया के जरिए संवेदनाएं जता रहे हैं। स्वानंद किरकिरे ने लिखा, "देश प्रेम के इस उन्मादी दौर में जब विकास के नाम पर सिर्फ विनाश की मूर्खतापूर्ण होड़ लगी है, आपका जाना हमें सही अर्थों में अनाथ कर गया।" देवेंद्र शर्मा ने लिखा, ''आज भी खरे हैं तालाब' लोकमानस में सहेजे हुए ज्ञान को पुस्तक रूप में लाने का श्रमसाध्य कार्य सिद्ध करनेवाले श्री अनुपम जी मिश्र की देह शांत हो गयी। अनुपम जी गांधीवादी रहे, अपने ढंग से उन्होंने गांधी के आश्रित हो लोक को समझने का प्रयास किया।"

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'इंटरनेट के इस दौर में वे चिट्ठी-पत्री और पुराने टेलीफोन के आदमी थे'

Anupam Mishra dead at 68

वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन ने लिखा, "स्मार्टफोन और इंटरनेट के इस दौर में वे चिट्ठी-पत्री और पुराने टेलीफोन के आदमी थे। लेकिन वे ठहरे या पीछे छूटे हुए नहीं थे। वे बड़ी तेजी से हो रहे बदलावों के भीतर जमे ठहरावों को हमसे बेहतर जानते थे।"

सौमित्र राय ने लिखा, "प्रकृति, पर्यावरण और हमारी बदलती जीवनशैली को लेकर उनकी चिंता, समुदाय आधारित उनके समाधान और खासकर राजस्थान में पानी को लेकर उनका काम कालजयी है। वे हमारे दिल में हमेशा रहेंगे।" अभिमन्यू ने फेसबुक पर लिखा, "पानी के शिक्षक अनुपम मिश्र अचानक ऐसे चल दिए जैसे पानी भाप मे बदल जाता है, पता नहीं चल पाता। अब कौन हमारी प्यास को पानी देगा। मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है ऐसे जल महापुरुष को।"

कोमकली ने लिखा, "सही अर्थों में भारतीय परिवेश, प्रकृति को गहराई तक समझने वाले अद्भुत विचारक,पर्यावरणविद, निश्चित ही अपनी तरह के विरले कर्मयोगी।" सुमित मिश्र, "अनुपम मिश्र जी पानी बचाने के लिए हमेशा आगे रहे, जिसका उदाहरण है जब भी उनके यहां जाएं तो पूछते थे कितना पानी पियोगे - आधा गिलास या उससे ज्यादा या फिर पूरा गिलास, जितना पियोगे उतना ही दूंगा। पानी बहुत कम है। इसे बर्बाद मत करना।"

'एक और तालाब सूख गया'

Anupam Mishra dead at 68

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी ने लिखा, "ये शब्द प्रभाष जोशी जी ने कभी अनुपम मिश्र के लिए लिखे थे। सच्चे, सरल, सादे, विनम्र, हंसमुख, कोर-कोर मानवीय। इस जमाने में भी बगैर मोबाइल, बगैर टीवी, बगैर वाहन वाले नागरिक। दो जोड़ी कुर्ते-पायजामे और झोले वाले इंसान। गांधी मार्ग के पथिक। 'गांधी मार्ग' के सम्पादक। पर्यावरण के चिंतक। 'राजस्थान की रजत बूँदें' और 'आज भी खरे हैं तालाब' जैसी बेजोड़ कृतियों के लेखक।"

अखिलेश ने लिखा, "एक जागे हुए व्यक्ति की तरह अनुपम जी मुझे हमेशा आकर्षित करते रहे। उन्हें मेरा प्रणाम। रजनीश झा ने लिखा, "एक और तालाब सूख गया। दादा (अनुपम मिश्र) का जाना वो खाली जगह है, जहां बस लटके हुए तालाब हैं। आप हमेशा ह्रदय में थे और रहेंगे। बस आप ना होंगे और आपके ना होने की रिक्तता कभी पूरी ना होगी। अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दादा।"

सचिन कुमार जैन ने लिखा, "पानी और पर्यावरण की एक अलग ही समझ विकसित करने वाले और भाषा के समाज से रिश्तों को सामने लाने वाले बहुत सहृदय और स्पष्ट व्यक्ति आदरणीय अनुपम मिश्र जी हमारे बीच नहीं रहे।"

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