{"_id":"5b5ab1d44f1c1bee748b62df","slug":"andhra-pradesh-cm-chandrababu-naidu-says-whosoever-becomes-pm-will-get-my-support","type":"story","status":"publish","title_hn":"2019 में जो भी बने प्रधानमंत्री, टीडीपी देगी समर्थन : नायडू","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
2019 में जो भी बने प्रधानमंत्री, टीडीपी देगी समर्थन : नायडू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:17 AM IST
विज्ञापन
चंद्रबाबू नायडू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने से इनकार करने के बाद एनडीए से अलग हुई तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि अगली बार प्रधानमंत्री कोई भी बने, वो उसका समर्थन देने का तैयार हैं। वह उसके साथ (प्रधानमंत्री) मिलकर काम करेंगे।
विज्ञापन
हालांकि, भाजपा इस वक्त देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है। इसलिए माना जा रहा है कि 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ही अपना परचम लहराएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर केंद्र की सत्ता पर काबिज होंगे। तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ऐसे हालात में वो नरेंद्र मोदी को समर्थन देंगे?
विज्ञापन
चंद्रबाबू नायडू ने एक अखबार को दिए साक्षात्कार में एनडीए से नाता तोड़ने और मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के सवाल पर कहा 'मोदी कहते हैं कि पिछले 30 सालों में यह पहली बार हुआ है कि एक गैर-कांग्रेसी सरकार लोकसभा में बहुमत हासिल करने में सक्षम रही है। लेकिन उन्हें यह भी महसूस करना चाहिए कि हमने भी इस सफलता में योगदान दिया है। हम बहुत अच्छी तरह से जानते थे कि उनके पास स्पष्ट बहुमत है। लेकिन अविश्वास प्रस्ताव बहुमत बनाम नैतिकता के बारे में था। आंध्र प्रदेश के लोगों के लिए अन्याय किया गया है।'
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि राज्य के विभाजन के समय नरेंद्र मोदी जो कि उस समय प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, ने वादा किया था कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा। इसी आशा में हमने एनडीए के साथ गठबंधन किया और तब से लेकर अब तक मैं 29 बार दिल्ली जा चुका हूं और केंद्रीय मंत्रियों से वादा पूरा करने का आग्रह कर चुका हूं। लेकिन किसी ने मेरी बात नहीं सुनी। इस लिहाज से हमारा गठबंधन में शामिल रहने का कोई मतलब नहीं बनता था।
उन्होंने कांग्रेस का साथ देने और विपक्ष के हमेशा एकजुट रहने के सवाल पर कहा कि भारत में सभी विपक्षी दलों की अपनी-अपनी मजबूरियां हैं। कुछ राज्यों में वो एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ते हैं। हमें इसका हल निकालना होगा और साथ मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने फिर दोहराया कि उनकी प्रधानमंत्री बनने की कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कई नेता हैं जो मुझसे अधिक सक्षम और योग्य हैं। मेरी दिल्ली जाने की कोई इच्छा नहीं है। हालांकि उन्होंने यह साफ-साफ कहा कि अगली बार कोई भी प्रधानमंत्री बने, वो उसे अपना समर्थन देने को तैयार हैं।