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Fibernet Scam: चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें बढ़ीं, फाइबरनेट घोटाले में सीआईडी ने दायर किया आरोप पत्र
Sat, 17 Feb 2024 02:39 AM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमरावती
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Sat, 17 Feb 2024 02:39 AM IST
सार
सीआईडी ने एक बयान में कहा कि नायडू के अलावा, नेट इंडिया, हैदराबाद के प्रबंध निदेशक वी हरि कृष्ण प्रसाद और आईआरटीएस अधिकारी के संबाशिव राव को अन्य आरोपी व्यक्तियों के रूप में नामित किया है।
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चंद्रबाबू नायडू
विस्तार
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। पुलिस के अपराध जांच विभाग ने शुक्रवार को 114 करोड़ रुपये के एपी फाइबरनेट घोटाला मामले में उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है। यह मामला विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट में पहुंचा है, जिसमें टीडीपी सुप्रीमो को मुख्य आरोपी बताया गया।
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सीआईडी ने एक बयान में कहा कि नायडू के अलावा, नेट इंडिया, हैदराबाद के प्रबंध निदेशक वी हरि कृष्ण प्रसाद और आईआरटीएस अधिकारी के संबाशिव राव को अन्य आरोपी व्यक्तियों के रूप में नामित किया है।
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क्या हैं सीआईडी के आरोप
जारी बयानों के मुताबिक पूर्व सीएम नायडू के पास ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और निवेश विभाग का प्रभार था। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से फाइबर नेट परियोजना को क्रियान्वित करने की सिफारिश की थी। उन्होंने आगे बताया कि एक पसंदीदा कंपनी को 330 करोड़ रुपये के एपी फाइबरनेट प्रोजेक्ट के चरण 1 के कार्य आदेश आवंटित करने के लिए निविदा प्रक्रिया में हेरफेर किया गया था।
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सीआईडी के अनुसार, टेंडर आवंटित करने से लेकर परियोजना को पूरा करने तक कई कथित अनियमितताएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। आरोपपत्र में आगे बताया गया कि नायडू ने इस तथ्य पर विचार किए बिना फाइबरनेट परियोजना के अनुमान को मंजूरी दे दी थी कि वस्तुओं की कीमतों या पालन किए जाने वाले मानकों के लिए कोई बाजार सर्वेक्षण नहीं किया गया था।
टेंडर देने का डाला दबाव
इसके अलावा, सीआईडी ने यह भी बताया कि पूर्व सीएम ने अन्य अनियमितताओं के बीच कथित तौर पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों पर हरि कृष्ण प्रसाद को विभिन्न निविदा मूल्यांकन समितियों में शामिल करने, टेरासॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड की ब्लैकलिस्टिंग को रद्द करने और अंततः उसी कंपनी को टेंडर देने के लिए दबाव डाला।
इसके अलावा, सीआईडी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आरोपी व्यक्तियों ने कथित तौर पर फर्जी चालान का उपयोग करके अपने सहयोगियों से संबंधित कंपनियों के एक नेटवर्क के माध्यम से गलत तरीके से धन का उपयोग किया।