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अमृतसर ट्रेन हादसा : चश्मदीदों ने ठहराया ट्रेन ड्राइवर को झूठा
एजेंसी, नई दिल्ली/अमृतसर
Updated Mon, 22 Oct 2018 04:39 AM IST
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अमृतसर में रावण दहन के दौरान 61 लोगों की मौत की जिम्मेदार बनने वाली ट्रेन के ड्राइवर के दावों को चश्मदीदों ने कोरा झूठ करार दिया है। दशहरे के दिन 19 अक्तूबर को हुए हादसे को लेकर ट्रेन ड्राइवर ने पुलिस और रेलवे अधिकारियों को दिए बयान में कहा था कि उसने ट्रेन को इसलिए नहीं रोका था, क्योंकि रावण दहन को देखने जुटी भीड़ में से कुछ लोग ट्रेन पर पत्थर फेंक रहे थे।
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हादसे के समय मौजूद रहे शैलेंद्र सिंह शैली ने कहा, मैं मौके पर था। ट्रेन के रुकने की बात तो दूर, उसकी रफ्तार भी धीमी नहीं हुई थी। शैली अमृतसर के वार्ड नंबर 46 के नगर निगम पार्षद हैं। उन्होंने ड्राइवर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। शैली ने कहा, ऐसा लग रहा था कि ड्राइवर हमें कुचलना चाहता था। ट्रेन वहां से चंद सेकंडों में गुजर गई। क्या यह संभव है कि जब आसपास इतने सारे लोग मर रहे हों या घायल हों तो हम ट्रेन पर पत्थर फेंकेंगे। क्या इतने दर्दनाक हादसे के दौरान तेजी से गुजर रही ट्रेन पर पत्थर फेंकना संभव है। ड्राइवर झूठ बोल रहा है।
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इमरजेंसी ब्रेक लगाने की बात भी गलत
ड्राइवर ने अपने बयान में भीड़ को देखने के बाद इमरजेंसी ब्रेक लगाने की बात कही थी। उसका कहना था कि इमरजेंसी ब्रेक के बावजूद कुछ लोगों के ट्रेन के सामने आ जाने के कारण हादसा हो गया। उसने यह भी कहा था कि लोगों को ट्रैक से हटाने के लिए उसने लगातार हॉर्न दिया।
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ड्राइवर का कहना है कि जब ट्रेन लगभग रुकने वाली थी तो लोगों ने पथराव शुरू कर दिया, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसने ट्रेन को अमृतसर की ओर बढ़ा दिया और वहां पहुंचकर रेल अधिकारियों को जानकारी दी। ड्राइवर की इस बात को भी चश्मदीदों ने गलत ठहराया है।
मौके पर मौजूद रहे परमजीत सिंह का कहना है, ट्रेन इतनी स्पीड में थी कि हादसा कुछ ही सेकंडों में हो गया। सैकड़ों वीडियो हैं, जिनसे पता चलता है कि ट्रेन कितनी तेज गति से गुजर रही थी। हम केवल लोगों की चीखें ही सुन सकते थे। हादसे की जगह मोहकमपुरा पुलिस स्टेशन के दायरे में आती है। वहां के एसएचओ सुखमिंदर सिंह ने कहा, जहां तक मेरी जांच में पता चला है तो हादसा स्थल पर ट्रेन के गुजरने क ेसमय किसी भी तरह का कोई पथराव नहीं हुआ था।
600 मीटर में रुक सकती है फुल स्पीड ट्रेन
रेल अधिकारियों की मानी जाए तो हादसे की जिम्मेदार डीजल इलेक्ट्रिक्ल मल्टीपल यूनिट (डेमू) ट्रेन की अधिकतम गति 96 किलोमीटर प्रति घंटा है। इस गति से चल रही खाली ट्रेन इमरजेंसी ब्रेक लगने पर अधिकतम 300 मीटर दूर जाकर रुक जाती है। वहीं सवारियों से भरी डेमू अधिकतम 600 मीटर दूर रुकती है। डीआरएम फिरोजपुर के मुताबिक, ट्रेन की रिकॉर्ड की गई आखिरी रफ्तार 68 किलोमीटर प्रति घंटा थी। ऐसे में वह इससे भी पहले रुक सकती थी।