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नए साथियों को अपनाने के लिए तैयार है भाजपा, अमित शाह ने दिया संकेत
Sat, 18 May 2019 12:51 AM IST
Avdhesh Kumar
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sat, 18 May 2019 12:51 AM IST
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amit shah
- फोटो : ANI
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को एक बार फिर दावा किया कि इस चुनाव में उनकी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलेगा और सरकार बनाने के लिए उन्हें किसी अन्य दल के सहयोग की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन इसके बाद भी उनके दरवाजे उन दलों के लिए खुले होंगे जो उनकी नीतियों-कार्यक्रमों से प्रभावित होकर उनके साथ जुड़ना चाहेंगे। अमित शाह ने यह कहकर दूसरे दलों को साथ लाने के लिए विकल्प खुले होने का संकेत दे दिया।
उनका यह बयान इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है कि इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा इस लोकसभा चुनाव में बहुमत से पीछे रह सकती है। ऐसी स्थिति में उसे नए साथियों की जरुरत पड़ेगी। शाह ने यह भी साफ कर दिया कि चुनावी नोक-झोंक का बाद की स्थितियों पर कोई असर नहीं पड़ता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में शुक्रवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने इशारों-इशारों में इस बात का भी संकेत दे दिया कि उनके साथ आने से किसी दूसरे दल की राजनीतिक भूमिका में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि इस देश के लिए बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था बहुत सही है, और इसने इस सरकार के कार्यकाल के साथ ही अनेक बार इस बात के प्रमाण भी दिए हैं।
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यह कहकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन दलों का भरोसा जीतने की कोशिश की जिन्हें कथित रूप से इस बात का डर रहता है कि अगर वे भाजपा के साथ जाते हैं तो उनकी भूमिका भविष्य में खत्म हो सकती है। इस तरह उन्होंने अन्य दलों को अपने साथ लेने का एक अन्य बड़ा संकेत भी दे दिया।
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उनका यह बयान इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण माना जा सकता है कि इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा इस लोकसभा चुनाव में बहुमत से पीछे रह सकती है। ऐसी स्थिति में उसे नए साथियों की जरुरत पड़ेगी। शाह ने यह भी साफ कर दिया कि चुनावी नोक-झोंक का बाद की स्थितियों पर कोई असर नहीं पड़ता है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में शुक्रवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने इशारों-इशारों में इस बात का भी संकेत दे दिया कि उनके साथ आने से किसी दूसरे दल की राजनीतिक भूमिका में कोई कमी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि इस देश के लिए बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था बहुत सही है, और इसने इस सरकार के कार्यकाल के साथ ही अनेक बार इस बात के प्रमाण भी दिए हैं।
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यह कहकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उन दलों का भरोसा जीतने की कोशिश की जिन्हें कथित रूप से इस बात का डर रहता है कि अगर वे भाजपा के साथ जाते हैं तो उनकी भूमिका भविष्य में खत्म हो सकती है। इस तरह उन्होंने अन्य दलों को अपने साथ लेने का एक अन्य बड़ा संकेत भी दे दिया।
लंबी तैयारी का जवाब विपक्ष के पास नहीं
अमित शाह ने कहा कि औपचारिक रूप से चुनाव अभियान की शुरुआत प्रधानमंत्री की मेरठ रैली से हुई थी, लेकिन लगभग तीन साल पहले से ही वे इसकी तैयारी में लग गए थे और इस दौरान सैकड़ों कार्यक्रम बनाए गए थे। इन कार्यक्रमों के जरिए वे लगातार जनता से जुड़े रहे। पिछले चुनाव में मोदी लहर के बाद भी भाजपा जिन 120 सीटों को जीतने में नाकाम रही थी, उनके लिए भी पार्टी ने विशेष रणनीति बनाई थी। इन सभी लोकसभा क्षेत्रों से बीजेपी को इस बार बहुत उम्मीदें हैं।
शाह के मुताबिक पूरे पांच साल के कार्यकाल में लगभग हर पंद्रह दिन पर एक लोकहितकारी योजना की शुरुआत की गई। इन योजनाओं के लगभग 22 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं। वे अपने कार्यक्रमों के बाद इन लाभार्थियों से लगातार मिलते रहे और उन्हें इन लाभार्थियों के वोट मिलने की पूरी उम्मीद है। यह संख्या भाजपा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने महज 17 करोड़ से कुछ अधिक ही वोट हासिल किये थे।
पार्टी के मुताबिक, पिछले चुनाव में उसके पास कार्यकर्ताओं का एक छोटा समूह था जबकि इस बार उनके कार्यकर्ताओं की संख्या 11 करोड़ को भी पार कर चुकी है। इन लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं की संख्या के भरोसे भाजपा को उम्मीद है कि वह अपने बूते ही इस बार भी बहुमत का आंकड़ा पार करने में कामयाब रहेगी।
पीएम को सामने रखकर पहली बार सरकार बनी, और वापस आएगी
अमित शाह ने कहा कि संभवतः पहली बार इस देश में ऐसा हुआ होगा कि किसी व्यक्ति को चुनाव के पहले ही प्रधानमंत्री घोषित करके चुनाव जीता गया हो, और उसी के नाम पर दोबारा जनादेश पाने के लिए चुनाव लड़ा गया हो। नरेंद्र मोदी इस मामले में अलग इतिहास बनाते दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा ने उन्हें पीएम पद के दावेदार के रूप में घोषित कर दिया था और जीत हासिल करने में कामयाब रही थी। अब दोबारा वह उन्हीं के नाम पर मैदान में है।
शाह के मुताबिक पूरे पांच साल के कार्यकाल में लगभग हर पंद्रह दिन पर एक लोकहितकारी योजना की शुरुआत की गई। इन योजनाओं के लगभग 22 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं। वे अपने कार्यक्रमों के बाद इन लाभार्थियों से लगातार मिलते रहे और उन्हें इन लाभार्थियों के वोट मिलने की पूरी उम्मीद है। यह संख्या भाजपा के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने महज 17 करोड़ से कुछ अधिक ही वोट हासिल किये थे।
पार्टी के मुताबिक, पिछले चुनाव में उसके पास कार्यकर्ताओं का एक छोटा समूह था जबकि इस बार उनके कार्यकर्ताओं की संख्या 11 करोड़ को भी पार कर चुकी है। इन लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं की संख्या के भरोसे भाजपा को उम्मीद है कि वह अपने बूते ही इस बार भी बहुमत का आंकड़ा पार करने में कामयाब रहेगी।
पीएम को सामने रखकर पहली बार सरकार बनी, और वापस आएगी
अमित शाह ने कहा कि संभवतः पहली बार इस देश में ऐसा हुआ होगा कि किसी व्यक्ति को चुनाव के पहले ही प्रधानमंत्री घोषित करके चुनाव जीता गया हो, और उसी के नाम पर दोबारा जनादेश पाने के लिए चुनाव लड़ा गया हो। नरेंद्र मोदी इस मामले में अलग इतिहास बनाते दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा ने उन्हें पीएम पद के दावेदार के रूप में घोषित कर दिया था और जीत हासिल करने में कामयाब रही थी। अब दोबारा वह उन्हीं के नाम पर मैदान में है।