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Amit Shah: 'पांच दिन में सुनवाई होती है, मेरी याचिका दो साल अटकी रही', शाह ने खारिज किए विपक्ष के आरोप

Mon, 25 Aug 2025 12:35 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 25 Aug 2025 12:35 PM IST
सार

अमित शाह ने सोहराबुद्दीन मामले को लेकर विपक्ष के आरोपों पर कहा कि 'जैसे ही मुझे सीबीआई से समन मिला, मैंने अगले ही दिन इस्तीफा दिया और मुझे बाद में गिरफ्तार किया गया। यह मामला चलता रहा और फैसले में भी कहा गया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला था।'

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amit shah deny opposition claim on 130 amendment bill said my bail lasted two years
अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विपक्ष द्वारा 130वें संविधान संशोधन विधेयक के विरोध के बीच अमित शाह ने कहा है कि जब सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में सीबीआई ने उन्हें समन जारी किया था तो उन्होंने समन मिलने के अगले ही दिन इस्तीफा दे दिया था। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक वे इस मामले से बरी नहीं हो गए, तब तक उन्होंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया। 
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'मैंने समन मिलते ही इस्तीफा दिया'
दरअसल विपक्ष ने अमित शाह पर आरोप लगाए हैं और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में जेल जाने के लिए शाह की नैतिकता पर सवाल उठाए। न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में अमित शाह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि 'जैसे ही मुझे सीबीआई से समन मिला, मैंने अगले ही दिन इस्तीफा दिया और मुझे बाद में गिरफ्तार किया गया। यह मामला चलता रहा और फैसले में भी कहा गया कि यह राजनीतिक प्रतिशोध का मामला था और मैं पूरी तरह से बेगुनाह था। फैसला बाद में आया, लेकिन मुझे जमानत पहले मिल गई। इसके बावजूद मैंने शपथ नहीं ली। इतना ही नहीं जब तक मुझे पूरी तरह से बरी नहीं कर दिया गया, मैंने कोई संवैधानिक पद भी नहीं लिया। विपक्ष मुझे कौन सा नैतिकता का पाठ पढ़ाना चाहता है?'
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'मेरी जमानत याचिका दो साल अटकी रही'
यह पूछे जाने पर कि क्या जस्टिस आफताब आलम उनके घर आए थे हस्ताक्षर लेने? इस पर अमित शाह ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि 'नहीं ऐसा नहीं हुआ था। जस्टिस आफताब आलम कभी मेरे घर नहीं आए। उन्होंने मेरी जमानत याचिका पर रविवार के दिन विशेष सुनवाई की और कहा कि गृह मंत्री होने के नाते मैं गवाहों को प्रभावित कर सकता हूं, तब मेरे वकील ने कहा कि जब तक जमानत याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक मेरे मुवक्किल गुजरात से बाहर रहेंगे। मैं दो साल राज्य से बाहर रहा क्योंकि देश के इतिहास में किसी की भी जमानत याचिका पर दो साल तक सुनवाई नहीं हुई, लेकिन जस्टिस आफताब आलम की कृपा से मेरी जमानत याचिका पर दो साल सुनवाई चली। जबकि आमतौर पर जमानत याचिका पर 11 दिन में फैसला हो जाता है।' विपक्ष भी 130वें संविधान संशोधन में जमानत के लिए 30 दिन के समय पर सवाल उठा रहा है। इस शाह ने कहा कि मेरे मामले के अलावा सुप्रीम कोर्ट में कोई भी जमानत याचिका का केस पांच दिन से ज्यादा नहीं चलता। 
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'संविधान निर्माताओं ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी'
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने भी कल्पना नहीं की होगी कि हमारे देश में सीएम जेल से सरकार चलाएंगे। उन्होंने कहा 'अदालत भी इस कानून की गंभीरता को समझती है। जब किसी सीएम या मंत्री को 30 दिन में पद से हटाया जाएगा तो उससे पहले अदालत तय कर सकती है कि उस व्यक्ति को जमानत मिलेगी या नहीं। जब अरविंद केजरीवाल जेल में थे और मामला उच्च न्यायालय चला गया था तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए था। उच्च न्यायालय ने भी कहा था कि केजरीवाल के नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मेरी पार्टी का मानना है कि देश के प्रधानमंत्री और किसी भी सीएम को जेल में रहते हुए सरकार नहीं चलानी चाहिए। जब संविधान बनाया गया था तो संविधान निर्माताओं ने कल्पना भी नहीं की होगी कि एक मुख्यमंत्री जेल जाएगा और जेल से ही सरकार चलाएगा।'

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