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एनजीओ-सरकारी कर्मचारियों को राहत, संपत्ति के खुलासे की समय सीमा बढ़ी

Thu, 28 Jul 2016 10:32 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 10:32 AM IST
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Amendment ombudsman Lokpal Bill passed
- फोटो : PTI

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) सरकारी सहायता और विदेशी चंदा प्राप्त करने के लिए वरिष्ठ प्रबंधन कर्मियों द्वारा परिसंपत्तियों और देनदारियों का खुलासा करने के लिए जुलाई 31 की समय सीमा अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया है।

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लोकसभा ने बुधवार को लोकपाल लोकायुक्त संशोधन बिल को बिना चर्चा के पारित कर दिया। संशोधन बिल के कानूनी जामा पहनने के बाद स्वयं सेवी संगठन, ट्रस्ट चलाने वाले लोगों, सरकारी नौकरी करने वालों को खुद और अपने करीबी संबंधियों की संपत्ति को घोषित करना अनिवार्य हो जाएगा।
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इसके अलावा इसके अनुच्छेद 44 में संशोधन कर लोकपाल लोकायुक्त की चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष की जगह सबसे बड़े विपक्षी दल के संसदीय दल के नेता को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि बिल को बुधवार को आनन-फानन पेश किया गया।

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बिना चर्चा के पास हुआ लोकपाल लोकायुक्त संशोधन

Amendment ombudsman Lokpal Bill passed
इसे कार्यवाही में पूरक एजेंडे के तौर पर शामिल किया गया। बिल पेश करने और इसे पारित करने का अनुरोध करते हुए कार्मिक एवं जनशिकायत मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसके अनुच्छेद 44 में तत्काल संशोधन की जरूरत है। दरअसल 31 जुलाई को संपत्ति का ब्योरा दिए जाने की अंतिम तारीख थी, जिसे अब बढ़ा दिया गया है।

ऐसे में इस बिल को तत्काल पारित किया जाना जरूरी है। सिंह ने बताया कि बिल को तत्काल पारित कराने के लिए दो दिन पूर्व ही कई दलों के सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि बिल अभी स्थाई समिति के पास है।

ऐसे में अगले सत्र में बिल में अन्य सिफारिशों को भी जगह दी जाएगी। सिंह के भाषण के दौरान कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उन्हें संशोधनों पर आपत्ति नहीं है। मगर यह संदेश नहीं दिया जाना चाहिए कि मोदी सरकार ने इस बिल को नए सिरे से पेश किया है। खड़गे ने याद दिलाया कि इस बिल को पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने वर्ष 2014 में ही पारित करा कर कानून का रूप दिया था।
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