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अमर उजाला पोलः 78 फीसदी ने माना मूत्र पीकर विरोध करना किसानों का गलत तरीका
amarujala.com-Presented by- अकरम
Updated Tue, 25 Apr 2017 06:40 PM IST
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राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर लगभग एक महीने से ज्यादा समय से तमिलनाडु के किसान अपनी मांगों को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए शनिवार को पेशाब पी लिया। उन्होंने फिर चेतावनी दी कि अगर अब भी मांगे नहीं मानी गईं तो वे मल खाएंगे।
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गौरतलब है कि तमिलनाडु के किसान अपनी मांगों को लेकर पिछले करीब 38 दिनों से मोदी सरकार के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। इस बीच में किसानों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान अर्धनग्न हुए, जिंदा चूहा खाया, मरे हुए सांप को मुंह में दबाया,घास खाया और नर की खोपड़ी गले में डालकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। लेकिन किसानों को अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई भी आश्वासन नहीं दिया गया है।
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तमिलनाडु के किसानों द्वारा पेशाब पीकर विरोध दर्ज कराने को लोग गलत बता रहे हैं। अमर उजाला द्वारा कराए गए पोल में पाठकों ने माना है कि मूत्र पीकर विरोध करने का किसानों का तरीका गलत है। पोल में सवाल किया गया था कि क्या मूत्र पीकर विरोध करने का किसानों का तरीका सही है? इस सवाल पर पाठकों ने अपना राय का खुलकर इजहार किया।
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सबसे ज्यादा 78.28% (3928) पाठकों ने कहा कि वे किसानों के मूत्र पीकर विरोध करने के तरीके को सही नहीं मानते। वहीं, 21.72% (1090) पाठक किसानों के मूत्र पीकर विरोध करने के तरीके से इत्तिफाक रखते हैं। पोल में कुल 5018 पाठकों ने हिस्सा लिया।