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अमर उजाला बसंत उत्सव: ब्रज धरा पर फूटे हंसी के ठहाके 

Sat, 18 Mar 2017 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मथुरा
अमर उजाला ब्यूरो/ मथुरा Updated Sat, 18 Mar 2017 11:12 PM IST
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amarujala basantutsav celebration in mathura
अमर उजाला की ओर से आयोजित बसंत उत्सव में अशोक चक्रधर को स्मृति चिह्न देते हुए जीएलए विवि के सेक्रेटरी व कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल, अमर उजाला के डायरेक्टर प्रबल घोषाल
ब्रज धरा पर शनिवार की शाम एकाएक हंसी के ठहाके फूटने लगे। श्रोताओं की तालियां रुकने का नाम नहीं ले रहीं थीं। हंसते-हंसते लोगों के चेहरे दुखने लगे तो कई अपना पेट पकड़कर ही बैठ गए। यह दृश्य अमर उजाला और जीएलए विश्वविद्यालय द्वारा यहां आयोजित बसंत उत्सव में दिखाई दिए। हंसी के दिग्गजों ने अपनी कला से लोगों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। 
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बसंत उत्सव का शुभारंभ अमर उजाला के डायरेक्टर प्रबल घोषाल व जीएलए विवि के सेक्रेटरी व कोषाध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने श्रीकृष्ण की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके बाद डायरेक्टर प्रबल घोषाल व नीरज अग्रवाल ने पद्मश्री से सम्मानित हास्य कवि अशोक चक्रधर, हास्य अभिनेता सुनील पॉल व लोक गायक मामे खान को बुके व स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। 
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स्वागत के बाद हास्य कवि अशोक चक्रधर ने मथुरा में मेट्रो चलने पर उद्घोषिका द्वारा की जाने वाली उद्घोषणा को जब ब्रजभाषा में बोला तो दर्शक हंस-हंस कर लोटपोट हो गए। उन्होंने 50 वर्ष पूर्व की अपनी स्मृति को भी यहां साझा किया। इसके बाद मंच पर उतरे सुनील पॉल का तालियां बजाकर स्वागत किया। सुनील पॉल ने ‘जहां तुझे कांटे मिले वहां फूल हो जाऊंगा, जहां तुझमें चांटे पडे़ वहां से गुल हो जाएगा’ गाकर लोगों को गुदगुदाया। उन्होंने अपना ट्रेडमार्क रतन नूरा किरदार निभाकर भी दर्शकों को हंसा हंसाकर उनके पेट में दर्द कर दिया। 
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लोक गायक मामे खान के गानों ने सुस्त होते दर्शकों में ऊर्जा भर दी। उनकी आरकेस्ट्रा ने उनका भरपूर साथ दिया। वहीं मंच संचालन कर रहे हास्य कवि दीपक गुप्ता ने भी बीच-बीच में अपनी रचनाओं और शेरो-शायरी से समां बांधे रखा। इस अवसर पर जिलाधिकारी नितिन बंसल, एसएसपी मोहित गुप्ता, सीडीओ मनीष वर्मा, आईपीएस कुंवर अनुपम सिंह, वेटरनेरी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केएमएल पाठक, एसपी ट्रैफिक आशुतोष द्विवेदी, एसपी सिटी अशोक कुमार सिंह, कथा वक्ता देवकीनंदन ठाकुर सहित अन्य मौजूद रहे। 

सूफी गायकी से सजी शाम
राजस्थान के मशहूर सूफी गायक मामे खान ने आवो जी पधारो हमारे देश केसरिया बालम। लुक छुप न जाओ जी, अरे मोय तरसाओ न, बाहर आओ शक्ल दिखाओ न गाकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपने सूफियाना अंदाज में गाकर कार्यक्रम में समां बांध दिया। 


ईजाद की चुगली लैंग्वेज
कामेडियन सुनील पॉल ने महिलाओं द्वारा आपस में चुगली करने की आदत के बारे में बताया कि महिलाओं की चुगली को कोई और नहीं समझ पाता है। यहां तक कि स्वयं भगवान भी नहीं। यह नई चुगली भाषा है। जो सिर्फ महिलाओं के लिए है।
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