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अमर उजाला पोल: नीतीश सरकार की ढिलाई के चलते हुई है शहाबुद्दीन की रिहाई
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 11 Sep 2016 05:23 PM IST
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : amar ujala
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आरजेडी नेता और बिहार में आतंक का पर्याय शहाबुद्दीन के जेल से निकलते ही बिहार में राजनीति तेज हो गई है। सीवान के इस बाहुबली नेता की रिहाई पर विपक्ष ने मुख्यमंत्री नीतीश को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के इशारे पर ही शहाबुद्दीन को जमानत मिली है।
बीजेपी नेता सुशील मोदी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अब नीतीश के एक तरफ भ्रष्टाचार के प्रतीक लालू यादव होंगे और दूसरी तरफ शहाबुद्दीन आतंक के प्रतीक होंगे। सरकार के कहने पर ही पुलिस और वकीलों ने शिथिलता दिखाई है, जिससे शहाबुद्दीन की रिहाई संभव हो पाई है। अमर उजाला ने इसी विषय पर पाठकों के साथ रायशुमारी की।
अमर उजाला ने ऑनलाइन पोल के जरिए पाठको से पूछा कि, 'क्या नीतीश सरकार की ढिलाई के चलते शहाबुद्दीन जेल से रिहा हुए हैं?' इस पोल में 4 हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। सर्वाधिक पाठकों की यही राय थी कि नीतीश सरकार की ढिलाई के चलते ही शहाबुद्दीन की रिहाई संभव हो पाई है।
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पोल में पाठकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए तीन विकल्प दिए गए थे। पहला-हां, नीतीश सरकार ने ढिलाई बरती है। दूसरा-नहीं, रिहाई कानूनी प्रकिया के जरिए हुई है। तीसरा-कह नहीं सकते। कुल शामिल 4,124 पाठको में से 3,434 पाठक यानी 83.27 फीसदी ने कहा कि नीतीश सरकार ने ढिलाई के चलते ही शहाबुद्दीन की रिहाई संभव हो पाई है।
पोल में शामिल 568 पाठक यानी 13.77 फीसदी ने कहा कि नहीं, शहाबुद्दीन की रिहाई कानूनी प्रकिया के जरिए ही हुई है। वहीं पोल में शामिल 122 पाठक यानी 2.96 फीसदी ने कहा कि वो इस मामले में कुछ कह नहीं सकते।
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बीजेपी नेता सुशील मोदी ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अब नीतीश के एक तरफ भ्रष्टाचार के प्रतीक लालू यादव होंगे और दूसरी तरफ शहाबुद्दीन आतंक के प्रतीक होंगे। सरकार के कहने पर ही पुलिस और वकीलों ने शिथिलता दिखाई है, जिससे शहाबुद्दीन की रिहाई संभव हो पाई है। अमर उजाला ने इसी विषय पर पाठकों के साथ रायशुमारी की।
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अमर उजाला ने ऑनलाइन पोल के जरिए पाठको से पूछा कि, 'क्या नीतीश सरकार की ढिलाई के चलते शहाबुद्दीन जेल से रिहा हुए हैं?' इस पोल में 4 हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। सर्वाधिक पाठकों की यही राय थी कि नीतीश सरकार की ढिलाई के चलते ही शहाबुद्दीन की रिहाई संभव हो पाई है।
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पोल में पाठकों की प्रतिक्रिया जानने के लिए तीन विकल्प दिए गए थे। पहला-हां, नीतीश सरकार ने ढिलाई बरती है। दूसरा-नहीं, रिहाई कानूनी प्रकिया के जरिए हुई है। तीसरा-कह नहीं सकते। कुल शामिल 4,124 पाठको में से 3,434 पाठक यानी 83.27 फीसदी ने कहा कि नीतीश सरकार ने ढिलाई के चलते ही शहाबुद्दीन की रिहाई संभव हो पाई है।
पोल में शामिल 568 पाठक यानी 13.77 फीसदी ने कहा कि नहीं, शहाबुद्दीन की रिहाई कानूनी प्रकिया के जरिए ही हुई है। वहीं पोल में शामिल 122 पाठक यानी 2.96 फीसदी ने कहा कि वो इस मामले में कुछ कह नहीं सकते।