{"_id":"5785c55f4f1c1b1b4313dac0","slug":"amar-ujala-poll-on-pakistan-army-rule-issue","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला पोल: 70 फीसदी ने माना पाक में फिर लौट सकता है सेना का शासन","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
अमर उजाला पोल: 70 फीसदी ने माना पाक में फिर लौट सकता है सेना का शासन
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 13 Jul 2016 10:06 AM IST
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पाकिस्तान में ताजा हालात को देखते हुए एक बार फिर से वहां सेना के शासन की अटकलें लगने लगी हैं। इसके चलते पहले से ही अस्थिरता से जूझ रहे देश में राजनीतिक माहौल गरम होने लगा है।
इस बात की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब पाकिस्तान के पंजाब की एक छोटी और कम पहचानी जाने वाली राजनीतिक पार्टी ने देश के 13 शहरों में पोस्टर लगाते हुए सेना प्रमुख राहिल शरीफ से रिटायरमेंट न लेने और देश में मार्शल लॉ लागू करने की मांग की है।
पाकिस्तान में लगे इन पोस्टरों को मद्देनजर अमर उजाला डॉट कॉम ने खास पोल में जनता से सवाल किया कि क्या पाकिस्तान में फिर सेना का शासन लौट सकता है?
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इस बात की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब पाकिस्तान के पंजाब की एक छोटी और कम पहचानी जाने वाली राजनीतिक पार्टी ने देश के 13 शहरों में पोस्टर लगाते हुए सेना प्रमुख राहिल शरीफ से रिटायरमेंट न लेने और देश में मार्शल लॉ लागू करने की मांग की है।
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पाकिस्तान में लगे इन पोस्टरों को मद्देनजर अमर उजाला डॉट कॉम ने खास पोल में जनता से सवाल किया कि क्या पाकिस्तान में फिर सेना का शासन लौट सकता है?
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पोल में कुल 2086 वोट पड़े
अमर उजाला पोल में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पोल में लोगों को तीन विकल्प दिए गए।
पहला विकल्प: हां, मौजूदा राजनीतिक हालात में ये संभव है, इस विकल्प को सबसे ज्यादा 1,456 वोट मिले। यानी कुल 69.8 फीसदी लोगों ने इसके पक्ष में अपना वोट दिया।
दूसरा विकल्प: नहीं, यह सिर्फ अटकलें हैं, इसके पक्ष में 283 वोट पड़े। यानी इस विकल्प को कुल 13.57 फीसदी वोट मिले।
तीसरा विकल्प: लोकतंत्र के लिए खतरे के संकेत, इस विकल्प को 347 वोट मिले हैं। यानी 16.63 फीसदी वोट मिले हैं। बता दें कि पोल में कुल 2086 वोट पड़े।
पहला विकल्प: हां, मौजूदा राजनीतिक हालात में ये संभव है, इस विकल्प को सबसे ज्यादा 1,456 वोट मिले। यानी कुल 69.8 फीसदी लोगों ने इसके पक्ष में अपना वोट दिया।
दूसरा विकल्प: नहीं, यह सिर्फ अटकलें हैं, इसके पक्ष में 283 वोट पड़े। यानी इस विकल्प को कुल 13.57 फीसदी वोट मिले।
तीसरा विकल्प: लोकतंत्र के लिए खतरे के संकेत, इस विकल्प को 347 वोट मिले हैं। यानी 16.63 फीसदी वोट मिले हैं। बता दें कि पोल में कुल 2086 वोट पड़े।