फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Alok Verma demands CBI independence in the petition

आलोक वर्मा ने याचिका में की सीबीआई की स्वतंत्रता की मांग, सीवीसी-डीओपीटी के आदेशों को बताया मनमाना

Wed, 24 Oct 2018 08:22 PM IST
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली 
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली  Updated Wed, 24 Oct 2018 08:22 PM IST
विज्ञापन
Alok Verma demands CBI independence in the petition
CBI Director Alok Verma

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई को एक स्वतंत्र और स्वायत्त एजेंसी बनाए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने अपनी याचिका में केंद्रीय सर्तकता आयोग और डीओपीटी के आदेश को मनमाना और गैरकानूनी बताते हुए रद्द करने की मांग की है।   

विज्ञापन


अमरउजाला को मिली याचिका की कापी के मुताबिक सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना पर निशाना साधते हुए कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपनी याचिका में लिखा है कि उन्हें जनवरी 2017 में देश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसी का निदेशक बनाया गया था और भारतीय पुलिस सेवा में उनका 35 सालों का रिकॉर्ड निर्विवाद और साफ-सुथरा रहा है।
विज्ञापन


उन्होंने लिखा है कि सीबीआई के स्वतंत्र और स्वायत्त एजेंसी होने की उम्मीद की जाती है, लेकिन हाल के संवेदनशील मामलों में जांच अधिकारी से लेकर संयुक्त निदेशक और निदेशक तक की सहमति थी, लेकिन उनके डिप्टी राकेश अस्थाना ने बिल्कुल अलग रुख अपनाया। वर्तमान हालातों में ऐसा कदम उस वक्त उठाया गया जब उच्चाधिकारी के खिलाफ जांच उस दिशा में नहीं गई, जैसी सरकार से उम्मीद थी। उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में अस्थाना के दिकक्तें पैदा करने से याचिकाकर्ता की छवि को नुकसान पहुंचा है। इस मामले में सीबीआई ने अलग से एफआईआर रजिस्टर की, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट में चैलेंज किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वर्मा की याचिका के मुताबिक मामलों की जांच चल रही थी कि रातोंरात केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और केंद्र सरकार ने उनकी सारी शक्तियां छीन लीं और किसी दूसरे की नियुक्ति कर दी। सरकार का यह फैसला डीपीएसई अधिनियम की धारा 4बी के खिलाफ है, जो सीबीआई को स्वतंत्रता बनाने और सीबीआई निदेशक बने रहने के लिए दो साल का सुरक्षित समय प्रदान करता है।

वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार और केंद्रीय सर्तकता आयोग को पार्टी बनाते हुए सीवीसी, डीओपीटी के 23 अक्टूबर के आदेशों को संविधान की धारा 14, 19 और 21 का उल्लंघन बताते हुए निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने अपनी याचिका में यह भी लिखा है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि सीबीआई को सरकार से अलग किया जाना चाहिए और हाल ही में इन घटनाक्रमों से यह साफ हो जाता है कि सीबीआई को डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (डीओपीटी) से स्वतंत्र किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे संस्थान की आजादी पर गंभीर खतरा हो रहा है।


साथ ही उन्होंने याचिका में लिखा है कि किसी भी सूरत में धारा 4ए प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस को उच्चस्तरीय समिति बनाने की अनुमति देता है, जो सीबीआई निदेशक की नियुक्ति कर सकती है। साथ ही धारा 4बी(2) के तहत सीबीआई निदेशक को स्थानांतरित करने के लिए इस समिति की सहमति आवश्यक है। लेकिन इस मामले में कानून से बाहर फैसला ले कर समिति के जनादेश को दरकिनार कर दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed