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गुरुद्वारे में दखल कर आरोप लगाते हुए अकाली दल ने दी थी गठबंधन छोड़ने की धमकी
Fri, 01 Feb 2019 05:29 AM IST
गौरव द्विवेदी
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Fri, 01 Feb 2019 05:29 AM IST
सार
- धमकी के बाद अकाली दल ने राजग की बैठक से बनाई दूरी
- एक दिन बाद बजट सत्र को ले कर राजग की बैठक से किया किनारा
- ठीक चुनाव के दौरान सबसे पुराने मित्र की नाराजगी से बढ़ी भाजपा की परेशानी
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अकाली दल
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विस्तार
अपने रूठे सहयोगियों के मानमनोव्वल में जुटी भाजपा को अब अपने सबसे पुराने मित्र अकाली दल ने तेवर दिखाए हैं। बुधवार को गठबंधन छोडने की धमकी के बीच पार्टी ने बृहस्पतिवार संसद केबजट सत्र की रणनीति को ले कर हुई बैठक से खुद को दूर कर अपनी नाराजगी का एक बार फिर से इजहार कर दिया। गौरतलब है कि बुधवार को अकाली दल ने गुरुद्वाराओं में राजनीति करने का आरोप लगाते हुए सरकार का ईंट से ईंट बजाने की धमकी दी थी।
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अकाली सूत्रों ने बताया कि पार्टी महाराष्ट्र के नांदेर में हजूर तख्त साहिब का भाजपा विधायक को प्रधान बनाने और महाराष्ट्र सरकार द्वारा गुरुद्घारा कानून में संशोधन कर विभिन्न गुरुद्घारे में प्रधानों की नियुक्ति का अधिकार अपने पास रखने से बेहद खफा है। मतभेद केसुर पटना साहिब मामले में भी दोनों दलों केबीच सामने आए थे। हालांकि तब सुखबीर सिंह बादल और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह केबीच हुई बातचीत केबाद स्थिति संभल गई। मगर इसके बाद नांदेर स्थित हुजूर तख्त साहिब में भाजपा विधायक केप्रधान बनने से अकाली दल फिर से नाराज हो गया।
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सूत्रों के मुताबिक कल अपने विधायक सिरसा के माध्यम से भाजपा और मोदी सरकार पर सीधा हमला बोल कर अकाली दल ने भाजपा नेतृत्व को इस मुद्दे पर समझौता न करने का संदेश दिया था। हालांकि दूसरी ओर से कोई सकारात्मक संदेश न मिलने केकारण पार्टी ने बृहस्पतिवार को राजग की अहम बैठक से किनारा कर लिया। पार्टी के लिए मुश्किल यह है कि उसने किसी तरह बिहार के अपने सहयोगियों जदयू और लोजपा को मनाया है। शिवसेना को मनाने की कोशिश कर रही है। जबकि अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी पहले से नाराज बैठी है। इससे पहले टीडीपी, असम गण परिषद, हम, रालोसपा जैसे कई दल राजग से पहले ही दूर जा चुके हैं।
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