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ईवीएम के बारे में वो सबकुछ जो जानना चाहते हैं आप

Thu, 13 Sep 2018 12:18 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 13 Sep 2018 12:18 PM IST
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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में चुनाव हमेशा ही एक जटल प्रक्रिया रहे हैं। इसे सरल बनाने के लिए चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का प्रयोग करता है। 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद से भारत में प्रत्येक लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव में मतदान की प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन द्वारा ही पूरी की जाती है। ईवीएम की गोपनीयता पर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं लेकिन अभी तक कोई भी इसे गलत प्रमाणित नहीं कर सका है। 

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ईवीएम के जन्म की कहानी
ईवीएम का अविष्कार 1980 में एम बी हनीफा द्वारा किया गया था। उन्होंने सबसे पहले 15 अक्टूबर 1980 को इसे पंजीकृत किया था। इसका सफर उस समय शुरू हुआ जब तमिलनाडु के छह शहरों में आयोजित होने वाली सरकारी प्रदर्शनी में जनता ने इसे पहली बार देखा। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग ने इसके उपयोग पर विचार किया और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सहायता से इसके बनने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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इसको और अधिक सटीक और सही बनाने में औद्योगिक डिजाइन सेंटर, आईआईटी बॉम्बे ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत में पहली बार इसका उपयोग 1998 में केरल के नॉर्थ पारावूर विधानसभा क्षेत्र के लिए होने वाले उपचुनाव के कुछ मतदान केंद्रों पर किया गया।
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इस तरह करती है ईवीएम काम
ईवीएम के दो हिस्से होते हैं, एक हिस्सा नियंत्रण के रूप में काम करता है जो मतदान अधिकारी के पास रहता है। वहीं इसका दूसरा हिस्सा मतदान ईकाई के रूप में काम करता है जिसे मतदान कक्ष के अंदर रखा जाता है। मतदान अधिकारी सबसे पहले मतदान बटन को दबाता है जिसके बाद मतदान कक्ष में उपस्थित मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी का चुनाव उसके पार्टी चिन्ह के सामने लगे नीले बटन को दबाकर करता है।

मशीन के दोनों ही भाग एक लंबे इलेक्ट्रॉनिक तार के माध्यम से जुड़े रहते हैं। ईवीएम को नियंत्रित करने के लिए सिलिकॉन से बने ऑपरेटिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है। एक बार इसका निर्माण होने के बाद इसे बनाने वाला भी इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता है।

इसके साथ ही ईवीएम मशीन के बटन को एक ही बार दबाया जा सकता है क्योंकि मतदान केंद्र पर उम्मीदवार के नाम के आगे के बटन को एक बार दबाने के बाद यह मशीन बंद हो जाती है। अगर कोई मतदाता दो बटन एक साथ दबाने का प्रयास करता है तो मतदान दर्ज नहीं होता है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बंगलूरू और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद मिलकर ईवीएम को संचालित करने वाली बैटरी का निर्माण करते हैं। ईवीएम को 6 वोल्ट की एक बैटरी से संचालित किया जाता है।


ईवीएम की क्षमता
एक ईवीएम में अधिकतम 64 उम्मीदवारों के नामों को ही अंकित किया जा सकता है और एक मशीन में अधिकतम 3840 वोट दर्ज किए जा सकते हैं। अगर किसी चुनाव क्षेत्र में  64 से अधिक उम्मीदवार होते हैं तो ऐसी स्थिति में आज भी पांरपरिक तरीके यानि मतपत्र से चुनाव होता है।

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