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समान नागरिक संहिता पर जनहित याचिका का विरोध, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहुंचा हाईकोर्ट
Fri, 23 Aug 2019 08:37 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Fri, 23 Aug 2019 08:37 PM IST
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दिल्ली हाईकोर्ट
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख कर, एकता, भाईचारा और राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका का विरोध किया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और विधि आयोग को यूनिफॉर्म सिविल कोड के कार्यान्वयन के संबंध में जनहित याचिका पर हलफनामा दायर करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट ने इस मामले को 27 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
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Matter is now listed for hearing on 27th August. https://t.co/fL4cppkYro
— ANI (@ANI) August 23, 2019
मामले में पक्षकार बनाए जाने का अनुरोध करते हुए, बोर्ड ने अपने आवेदन में दलील दी कि कानून के तहत यह जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इस पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।बोर्ड ने दावा किया कि याची भारतीय जनता पार्टी के नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय को निरर्थक याचिकाएं दायर करने की आदत है।
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बोर्ड ने अपनी अर्जी में कहा कि मौजूदा याचिका निरर्थक है और अब यह कानूनी मुद्दा नहीं है। बोर्ड ने कहा कि उच्चतम न्यायालय 2003 में इस मुद्दे पर गौर कर चुका है। उसने उपाध्याय पर ऐसा जुर्माना लगाने की मांग की जो एक मिसाल कायम करे।
आवेदन में आगे कहा गया है कि बोर्ड, समान नागरिक संहिता का भारतीय मुस्लिमों के निजी कानूनों के व्यावहारिक पहलुओं पर पड़ने वाले संभावित असर से फिक्रमंद है। बोर्ड ने आवेदन में कहा कि मौजूदा ‘शरारतपूर्ण’ याचिका के जरिए मौजूदा यथास्थिति (जिसमें भारतीय मुसलमानों के निजी मामले इस्लामी धार्मिक कानून के जरिए निर्धारित होते हैं) पर हमला करने की कोशिश है।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रूख कर, एकता, भाईचारा और राष्ट्रीय एकजुटता को बढ़ावा देने के लिए समान नागरिक संहिता बनाने का अनुरोध करने वाली एक जनहित याचिका का विरोध किया है।