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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने रहेंगे डोभाल, पांच साल के लिए मिला कैबिनेट मंत्री का दर्जा
Mon, 03 Jun 2019 07:41 PM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Mon, 03 Jun 2019 07:41 PM IST
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राष्ट्रीय रक्षा सलाहकार अजीत डोभाल
- फोटो : PTI
अजीत डोभाल देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने रहेंगे। साथ ही भारत सरकार में उनका दर्जा कैबिनेट मंत्री स्तर का होगा। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में उन्हें राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त था। राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके योगदान को देखते हुए डोभाल को फिर से यह जिम्मेदारी दी गई है।
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Delhi: National Security Advisor Ajit Doval leaves from MHA. He has been given Cabinet rank in Government of India in recognition of his contribution in the national security domain. His appointment will be for five years. pic.twitter.com/jhTtkqSVUJ
— ANI (@ANI) June 3, 2019विज्ञापन
सोमवार को कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में इसकी जानकारी दी गई है। आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने डोभाल को इस पद पर दोबारा नियुक्त किये जाने के संबंध में अपनी मंजूरी दे दी है और यह व्यवस्था 31 मई 2019 से प्रभावी होगी। प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ-साथ उनकी नियुक्ति भी स्वत: समाप्त हो जाएगी ।
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आदेश में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर नियुक्ति के दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का रैंक दिया गया है। डोभाल को पहली बार मई 2014 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया था और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया था।
कांधार विमान अपहरण और डोकलाम विवाद सुलझाने में अहम भूमिका
गौरतलब है कि भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान में आतंकियों पर की गई सर्जिकल स्ट्राइल और एयर स्ट्राइक की योजना के पीछे एनएसए डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। एक अधिकारी ने बताया कि सितंबर 2018 में भी भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सीमा में सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इस सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाने में डोभाल की भूमिका अहम रही है।भारत, चीन और म्यांमार सीमा पर स्थित डोकलाम के विवाद को सुलझाने में भी डोभाल की अहम भूमिका रही है। डोभाल जनवरी 2005 में इंटेलिजेंस ब्यूरो प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे। उन्होंने अपनी सेवा के 33 साल एक खुफिया अधिकारी के तौर पर पूर्वोत्तर भारत, जम्मू कश्मीर और पंजाब में दिए हैं।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 1968 बैच के अधिकारी रहे डोभाल अपनी दिमागी रणनीति और शानदार कूटनीति के लिए जाने जाते हैं। साल 1999 में हुए कांधार विमान अपहरण मामले में अपहरणकर्ताओं के साथ वह देश के मुख्य वार्ताकार थे।