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Hindi News ›   India News ›   Agnipath Scheme: After all why Agniveer is already running on Agnipath why are former army officers silent 

Agnipath Scheme: आखिर 'अग्निवीर' पहले ही क्यों चल रहे हैं 'अग्निपथ' पर, पूर्व सैन्य अफसर क्यों हैं खामोश?

Mon, 20 Jun 2022 09:16 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 20 Jun 2022 09:16 PM IST
सार

तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सरकार इस 4 साल की भर्ती योजना की तारीफ में जुटी है, लेकिन पूर्व सैन्य अधिकारी खामोश हैं।

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Agnipath Scheme: After all why Agniveer is already running on Agnipath why are former army officers silent 
Agnipath Scheme Indian Army Agniveer - फोटो : Defence Ministry

विस्तार

सेना ने अग्निपथ पर सेना के जवानों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की अधिसूचना जारी कर के 'अग्निवीर' बनाने का अपना संकल्प सार्वजनिक कर दिया है। सरकार के कदमताल पर देश की तीनों सेनाओं ने कदम बढ़ाना शुरू किया है, तो दूसरी तरफ सेना में सिपाही के तौर पर 15 साल के लिए भर्ती होने का सपना पाले युवा राज्यों में अग्निवीर बनने से पहले अग्निपथ पर दौड़ रहे हैं। दिलचस्प है कि तीनों सेनाओं के प्रमुख, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सरकार इस 4 साल की भर्ती योजना की तारीफ में जुटी है, लेकिन पूर्व सैन्य अधिकारी खामोश हैं।

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क्या कहती है सेना?
सेना की अधिसूचना के अनुसार जुलाई 2022 से भर्ती के लिए विज्ञापन, अगस्त से भर्ती प्रक्रिया, दिसंबर से 25 हजार जवानों का प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार 83 भर्ती रैलियों के माध्यम से 40 हजार अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के एडिशनल सेक्रेटरी ले. जनरल अनिल पुरी के मुताबिक अब 4 साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया ही चलेगी। 15 साल के लिए सेना में सिपाही के तौर पर भर्ती होने वाले जवानों की प्रक्रिया समेत अन्य प्रक्रिया नहीं होगी। इसके कारण में जनरल पुरी के दो तर्क हैं। पहला सेना को यंग आर्मी बनाना है। मौजूदा समय में सेना में अधिकांश जवानों की उम्र 30 साल को पार कर चुकी है। कोरोना काल के कारण दो साल से अधिक समय से सेना में भर्ती रुकी हुई है। साथ में जोड़ते हैं कि सेना में अफसरों को कॉडर मिलने में देर हुई है।
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पूर्व सैन्य अफसरों ने क्यों साध रखी है चुप्पी?
तीनों सेनाओं के सैन्य अधिकारियों ने इस मामले में काफी हद तक चुप्पी साध रखी है। पिछले कई दिनों में सेनाओं के ब्रिगेडियर और जनरल पदों से सेवा मुक्त हुए दो दर्जन से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों से अग्निवीर योजना को लेकर चर्चा हुई। करीब-करीब सभी इस योजना से सहमत नहीं है। सेना से अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) बलवीर सिंह संधू को 4 साल की भर्ती योजना बिल्कुल नहीं जम रही है। वह साफ कहते हैं कि नाम चाहे अग्निवीर दे दीजिए, अग्निपथ करार दीजिए, लेकिन इसे जल्दबाजी के फैसले के सिवा कुछ नहीं कहूंगा। जनरल संधू को 4 साल की सेवा, चार साल बाद अवकाश, 25 प्रतिशत को सेना में जगह और शेष 10 प्रतिशत के लिए विभिन्न सेवाओं में 10 प्रतिशत के कोटे का भी कांसेप्ट कम समझ में आ रहा है। एक अन्य पूर्व मेजर जनरल सवाल उठाते हैं कि 4 साल बाद जब इन अग्निवीरों को पुन: रोजगार नहीं मिलेगा तो 22 साल की उम्र में ये अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए क्या करेंगे? क्या इस पर भी किसी का ध्यान है?
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यह योजना क्यों लाई गई?
जनरल बलवीर सिंह संधू को कहना है कि मुझे तो बस दो कारण समझ में आते हैं। पहला यह कि पेंशन के बजट का बोझ कुछ कम किया जाए। दूसरा कारण सेना को कम उम्र वाली बनाना है। जनरल संधू के इस तर्क से सेना, वायुसेना और नौसेना के कई पूर्व सैन्य अधिकारी सहमत हैं। एक पूर्व शीर्ष अफसर का कहना है कि सेना में सेवा, शर्तो, भत्तों, पेंशन आदि में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। इसलिए इसे कम करने के लिए अग्निवीर के तौर पर जवानों की भर्ती की योजना बनी होगी। मेरे विचार में यह कम से कम सात या नौ साल के लिए होती और सात या नौ साल बाद रिटायर होने वाले जवानों के अवकाश प्राप्त करने वाले पैकेज, पुनर्वास (पुन: रोजगार) पर ध्यान दिया जाता तो ठीक था। नाम न छापने की शर्त पर वह साफ कहते हैं कि अभी कुछ बोलना ठीक नहीं है।

सेना के एक सिपाही और अग्निवीर में क्या अंतर होगा?
सेना का एक सिपाही 15 साल के लिए भर्ती होता है। 33 साल की उम्र होने तक वह सेना से अवकाश प्राप्त करने लगता है। मौजूदा समय में उसे सेना में भर्ती होने पर 21,700 रुपये मूल वेतन, 1800 रुपये यात्रा भत्ता, 5200 रुपये सैन्य सेवा भत्ता और इन तीनों को जोड़कर 34 प्रतिशत की दर से 9758 रुपये मंहगाई भत्ता के साथ 39000 रुपये से अधिक प्राप्त होते हैं। वह साल में दो डीए अलाउंस का हकदार होता है। उसे मिलिट्री पे सर्विस मिलता है। साल भर में 90 छुट्टियां ले सकता है। प्रमोशन मिलते हैं और उसका स्तर उठता जाता है। 15 साल बाद रिटायर होने पर ग्रच्युटी, अवकाश प्राप्त करने के समय मिलने वाले लाभ, पेंशन आदि उसके खाते में आती है। आजीवन सेना की कैंटीन और सैन्य कल्याण बोर्ड के तहत पूर्व सैनिकों को मिलने वाले लाभ का हकदार होता है। सेना में सेवा करने के दौरान तमाम सुरक्षा कवच उसके  पास रहते हैं।

अग्निवीर तो अग्निवीर होंगे
अग्निवीर की वर्दी का बैज अलग होगा। इनका फंड अलग सेवा निधि में जमा होगा। सर्विस ही 4 साल की होगी और इसमें से 25 प्रतिशत तक ही पूर्णकालिक सेवा अथवा आगे के लिए चयनित किए जाएंगे। इसलिए अवकाश प्राप्त करने वाले अग्निवीर डीए अलाउंस, रिटायर होने के समय मिलने वाले भत्ते, ग्रेच्युटी, 10 साल से पहले रिटायर होने के कारण पेंशन, मिलिट्री सर्विस पे आदि से वंचित रहेंगे। सेना से अवकाश प्राप्त करने के बाद मिलिट्री कैंटीन सेवा से भी वंचित हो जाएंगे। हालांकि ले. जन बंशी पोनप्पा समेत अन्य इसकी वकालत करते हुए कहते हैं कि 4 साल की सेवाकाल के दौरान इन अग्निवीरों को सैनिकों जैसा ही आदर, सम्मान, व्यवहार मिलेगा। सेवाकाल में शहादत पर 1 करोड़ रुपये, अपंग होने पर 48 लाख रुपये मिलेंगे। लेकिन जब बात पुन: रोजगार, 22-23 साल की उम्र में सेना से बाहर आने के बाद की स्थिति पर सवाल होता है, तो इसके स्पष्ट जवाब नहीं होते।

4 साल के सेवाकाल में पहले साल अग्निवीरों की तनख्वाह 30 हजार रुपये निश्चित है। इसमें से 30 प्रतिशत यानी 9 हजार रुपये सरकार कटौती करेगी और 9 हजार रुपये सरकार जोड़कर 18 हजार रूपये अग्निवीर सेवा निधि में जमा कराएगी। दूसरे साल 36,500, तीसरे साल 39 और आखिरी साल 40,000 के करीब अग्निवीरों को प्रतिमाह तनख्वाह मिलेगी। अवकाश प्राप्त करने के बाद सेवा निधि में जमा करीब 10.04 लाख रुपये और ब्याज सहित कुल करीब पौने 12 लाख रुपये लेकर रिटायर हो जाएंगे। सेना के सिपाही को साल में 90 दिन की तो अग्निवीरों को 30 दिन का ही अवकाश मिलेगा।

क्या सेना के दर्शन से मेल खाएंगे अग्निवीर?
यह सवाल सेना के पूर्व जनरलों के मन में भी हैं। भारतीय सेना नाम, नमक, निशान के दर्शन पर काम करती है। नाम यानी वह यूनिट अथवा बैनर। जो नमक जवान खाते हैं, वह उस यूनिट का होता है। उसके साथ पूरी तरह प्रतिबद्ध, अनुशासित, समर्पित रहने का सिद्धांत है। हर यूनिट का अपना निशान है। उसकी आन,बन, शान की रक्षा करना यूनिट के हर सैनिक का धर्म है। सभी यूनिटें मिलकर सेना का मजबूत स्तंभ बनाती हैं। जनरल संधू कहते हैं कि यह पूरा प्रशिक्षण और एकीकरण से जुड़ा मामला है। एक सैनिक से लेकर एक अधिकारी तक को इस दर्शन की पूर्णता को पाने में थोड़ा वक्त लगता है। जनरल संधू कहते हैं जब इसका सवाल मन में आता है तो लगता है कि जब इसी परिपक्वता को प्राप्त करने की स्थिति आएगी, तबतक अधिकांश अग्निवीर रिटायर हो जाएंगे।  


क्यों भड़क गए हैं कई राज्यों के युवा?
बिहार, उ.प्र., म.प्र. समेत कई राज्यों में युवाओं में आक्रोश है। इसके अपने कारण हैं। अब सेना में पंजाब जैसे समृद्ध राज्य के जवान जरा कम रुचि लेते हैं। गुजरात, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के युवा भी थोड़ा पीछे रहते हैं। कुछ सालों से हरियाणा में रुचि में गिरावट के संकेत हैं। लेकिन बिहार, उ.प्र., राजस्थान, म.प्र. जैसे तमाम राज्यों के युवाओं में सेना में जाने का क्रेज है। इसका एक बड़ा कारण ईमानदार तरीके से सेना में होने वाली भर्ती की प्रक्रिया है। जहां फिजिकल, मेडिकल और लिखित पास होने के बाद कोई संदेह नहीं रहता। इन राज्यों के युवा हर साल सेना, अर्ध सैनिक बल, पुलिस में भर्ती होने की तैयारी करते हैं। कोरोना संक्रमण काल के कारण पिछले दो साल से अधिक समय से भर्ती नहीं हुई है। यही स्थिति अन्य अर्ध सैनिक बलों की भी है। ऐसे में बढ़ती बेरोजगारी और सरकार की अग्निवीर जैसी बेस्वाद योजना युवाओं में लगातार आक्रोश बढ़ा रही है। राजनीतिक दल भी इसमें अपना हित साध रहे हैं।

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