फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Agneepath Scheme: Veterans say, keeping in mind the new challenges, army keeps on making changes time to time, Agneepath scheme should be seen like this

Agneepath Scheme: ‘ढाई मोर्चे’ पर युद्ध के लिए तैयार होने की रणनीति है अग्निपथ योजना, पूर्व ब्रिगेडियर ने कही ये बड़ी बात

Mon, 20 Jun 2022 08:11 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 20 Jun 2022 08:11 PM IST
सार

ब्रिगेडियर डॉ. भुवनेश चौधरी (रिटायर्ड) ने अमर उजाला से कहा कि सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की रक्षा करने की होती है। इसके लिए नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वह समय-समय पर उचित बदलाव करती रहती है। अग्निपथ योजना को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जाना चाहिए...

विज्ञापन
Agneepath Scheme: Veterans say, keeping in mind the new challenges, army keeps on making changes time to time, Agneepath scheme should be seen like this
अग्निपथ योजना का विरोध - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

देश के पहले सीडीएस और पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने जून 2017 में एक सेमिनार के दौरान कहा था कि भारतीय सेना ‘ढाई मोर्चे’ पर युद्ध के लिए हमेशा तैयार है। इसमें दो मोर्चों का संकेत चीन और पाकिस्तान के लिए था, जबकि शेष ‘आधे मोर्चे’ का अर्थ देश की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति से जोड़कर देखा गया था। कुछ सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि अग्निपथ योजना देश को उस स्थिति से निपटने के लिए तैयार करने की योजना है, जिसका इशारा उस समय जनरल रावत ने किया था। इन विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को अपनी सेना के सर्वोच्च अधिकारियों की बातों पर भरोसा करना चाहिए और अग्निवीर बनने के लिए तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।

विज्ञापन


ब्रिगेडियर डॉ. भुवनेश चौधरी (रिटायर्ड) ने अमर उजाला से कहा कि सेना की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की रक्षा करने की होती है। इसके लिए नई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वह समय-समय पर उचित बदलाव करती रहती है। अग्निपथ योजना को इसी कड़ी से जोड़कर देखा जाना चाहिए। पूर्व सीडीएस और थल सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने बेहद स्पष्ट शब्दों में बता दिया था कि हमारे देश के सामने कभी भी ‘ढाई मोर्चे’ पर युद्ध लड़ने की आवश्यकता पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि अग्निपथ योजना इसी उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में सेना के द्वारा उठाया गया बेहद महत्त्वपूर्ण कदम है। भारत को ऐसी किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

विज्ञापन

ट्रेनिंग पाया युवा नहीं जाएगा गलत रास्ते पर

डॉ. भुवनेश चौधरी ने कहा कि चीन लगातार सीमा पर इस तरह की हरकतें कर रहा है, और भारत अपनी आंखें मूंदे नहीं रह सकता। वहीं, पाकिस्तान पारंपरिक रूप से हमेशा भारत का विरोध करता रहा है। लिहाजा भारत के पास इन दोनों मोर्चों पर एक साथ युद्ध लड़ने की क्षमता हमेशा उपलब्ध होनी चाहिए। इसके बिना देश की सीमाओं को हमेशा के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में अलगाववाद-आतंकवाद का खतरा मंडराता रहता है। कभी-कभी सांप्रददायिक तनाव भी ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे देश के सामने खतरा पैदा हो सकता है। यदि भारत के पास अग्निवीरों के रूप में लाखों प्रशिक्षित नागरिक होंगे, तो इस तरह की परिस्थिति का देश ज्यादा सक्षम तरीके से मुकाबला कर पाएगा। उन्होंने कहा कि सेना की ट्रेनिंग पाए युवा स्वयं कभी गलत राह पर नहीं जाएंगे। पूर्व सैनिकों के जीवन का अनुभव बताता है कि किसी गलत रास्ते पर जाकर 50 हजार रुपये कमाने की बजाय वे 20-25 हजार रुपये की नौकरी करने को ज्यादा प्राथमिकता देंगे। साथ ही वे दूसरों को भी एक बेहतर नागरिक बनने के लिए प्रेरित करेंगे।   

उन्होंने कहा कि युवाओं को समझना चाहिए कि सेना देश की सुरक्षा का माध्यम है। वह कोई रिक्रूटमेंट एजेंसी नहीं है जो लोगों को नौकरी उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। इसलिए केवल नौकरी के लिए किसी युवा को सेना की ओर नहीं देखना चाहिए क्योंकि यह देश सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है।  

सेना की सोच समझें

ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी (रिटायर्ड) ने कहा कि देश के सामने ढाई मोर्चे वाली चुनौती तो है, लेकिन वह ये नहीं मानते कि अग्निपथ योजना इस स्थिति का सामना करने के लिए लाई गई है। उन्होंने कहा कि ढाई मोर्चे की लड़ाई जीतने के लिए केवल सेना की उम्र कम करना एकमात्र कदम नहीं हो सकता। इसके लिए देश के पास पर्याप्त रक्षा उपकरण निर्माण की क्षमता, तकनीकी एडवांसमेंट, नए उपकरण और नई तकनीकी से काम करने वाले युवाओं की आवश्यकता होगी। लेकिन, वे यह मानते हैं कि ‘अग्निपथ योजना’ केवल देशहित को ध्यान में रखकर लाई गई है और युवाओं को सेना के अधिकारियों की बातों पर विश्वास करना चाहिए।

सेना के काम करने की शैली को समझें

ब्रिगेडियर (रि.) त्रिपाठी ने कहा कि जो लोग सेना के कार्य करने की शैली नहीं समझते, उन्हें ही सेना की किसी योजना से परेशानी हो सकती है। जो लोग सेना में काम कर चुके हैं, वे यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि सेना के उच्च अधिकारी अपने निचले स्तर के जवानों का उसी तरह से ध्यान रखते हैं, जैसे कोई माता-पिता अपने बच्चों का ध्यान रखते हैं। यह केवल सेना में कार्यरत जवानों के लिए नहीं होता है, बल्कि जब जवान रिटायर होकर अपने घर चला जाता है, तब भी रेजीमेंट एक प्रणाली के अंतर्गत लगातार उनसे जुड़ा रहा जाता है और उनके भविष्य की चिंता की जाती है। इसलिए सेना से जुड़ने वाले किसी युवा को अपने भविष्य के लिए चिंतित नहीं होना चाहिए।

क्या किया जाना चाहिए

ब्रिगेडियर डीएस त्रिपाठी (रिटायर्ड) ने कहा कि इस योजना को पेश करने के समय कुछ गलतियां हुई जिन्हें अब सुधारा जा रहा है। शायद आने वाले समय में कुछ और सुधार किए जाएंगे। योजना के अमल में आने के बाद इसकी खामियां पता चलेंगी तब समय-समय पर इसमें और ज्यादा बदलाव किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि योजना पेश करते समय ही युवाओं के भविष्य की चिंता का बेहतर प्लान पेश कर दिया गया होता तो उनमें अपने लिए असुरक्षा की भावना पैदा न होती।

उन्होंने कहा कि सेना ने चार साल की नौकरी के दौरान युवाओं को 12वीं का प्रमाण पत्र देने की बात कही है। लेकिन इस योजना को और ज्यादा बेहतर करते हुए उन्हें उस ट्रेड में बेहतर शिक्षा (डिग्री-डिप्लोमा) का अवसर दिया जाना चाहिए, जिनसे संबंधित ट्रेड में वे सेना में काम कर रहे होंगे।



चार साल की सेवा के बाद जिन विभागों-मंत्रालयों में उन्हें स्थापित करने की बात कही जा रही है, इस योजना की घोषणा टुकड़ों-टुकड़ों में न होकर एक समग्र योजना के रूप में पेश की जानी चाहिए थी। इससे युवाओं के मन में अपने भविष्य को लेकर कोई संदेह न पैदा होता। अब भी इस तरह की बेहतर योजना युवाओं की नाराजगी दूर कर सकती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed