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इंदौर से कॉल, मुंबई टारगेट: डिजिटल अरेस्ट से बचा तो उसे बनाया कमाई का जरिया, 150 करोड़ की ठगी में अब गिरफ्तार

Thu, 15 Oct 2026 03:18 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 15 Oct 2026 03:18 PM IST
सार

मुंबई क्राइम ब्रांच ने इंदौर के ग्राफिक डिजाइनर पंकज गुप्ता को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने 2,805 खतरनाक APK फाइलें बनाकर साइबर ठगों को बेचीं। इनकी मदद से देशभर में 9,673 लोगों से करीब 150 करोड़ रुपये की ठगी की गई। मामले की जांच जारी है।

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After failing ensnare a victim 'digital arrest perpetrators turned tactic revenue stream now arrested
साइबर अपराध (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पुलिस ने गुरुवार को बताया कि 36 साल के एक ग्राफिक डिजाइनर ने, जो खुद एक बार 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम का शिकार होने से बाल-बाल बचा था। बाद में ऐसा मैलिशियस सॉफ्टवेयर (हानिकारक सॉफ्टवेयर ) बनाया, जिसकी मदद से साइबर ठगों ने 9,600 से ज्यादा लोगों को 150 करोड़ रुपये का चूना लगाया।
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अधिकारियों के अनुसार, इंदौर के रहने वाले पंकज गुप्ता को मुंबई क्राइम ब्रांच के प्रॉपर्टी सेल ने गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने 2,805 मैलिशियस एंड्रॉइड पैकेज किट (एपीके) फाइलें बनाईं और उन्हें बिहार तथा झारखंड से काम करने वाले साइबर अपराधियों के नेटवर्क को सप्लाई कीं।
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अधिकारी ने क्या बताया?
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, 'पांच साल पहले, गुप्ता एक 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले का शिकार होने से बाल-बाल बचे थे। इससे दूर रहने के बजाय, उन्होंने इसमें एक कारोबारी मौका देखा और जालसाजों से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें खास तौर पर तैयार की गई एपीके फाइलें दीं, जो एक तरह के डिजिटल 'रिमोट कंट्रोल' की तरह काम करती हैं और किसी के भी स्मार्टफोन का कंट्रोल अपने हाथ में ले सकती हैं।'
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एक खतरनाक एपीके फाइल असल में एक नकली या वायरस से संक्रमित एंड्रॉइड एप्लिकेशन होती है, जिसे संवेदनशील डेटा चुराने, ओटीपी इंटरसेप्ट करने या किसी मोबाइल डिवाइस का रिमोट कंट्रोल हासिल करने के लिए बनाया जाता है।

पुलिस के अनुसार, कोडिंग जानने वाले गुप्ता ने ऐसी एपीके फाइलें बनाईं जो देखने में सरकारी या अन्य जरूरी सेवाओं (जैसे सीनियर सिटीजन कार्ड वेरिफिकेशन, ई-ट्रैफिक चालान, पेंशन वेरिफिकेशन, क्रेडिट कार्ड अपडेट और पीएम किसान योजना पोर्टल) जैसी लगती थीं।

कैसे हुआ खुलासा? 
इस मामले में तब बड़ी कामयाबी मिली, जब मुंबई के भायखला इलाके के एक वरिष्ठ नागरिक ने 13 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई कि उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। अधिकारी ने बताया, 'पीड़ित को एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को एक सरकारी बैंक का प्रतिनिधि बताया और 'सीनियर सिटीजन कार्ड योजना' में मदद करने का झांसा दिया। टेक्स्ट मैसेज में भेजे गए एक एपीके लिंक पर क्लिक करते ही, उनके खाते से 5.62 लाख रुपये निकाल लिए गए।'

पुलिस ने आरोपी को कैसे पकड़ा? 
तकनीकी जांच के जरिए मुंबई क्राइम ब्रांच इंदौर में बैठे गुप्ता तक पहुंच गई। पुलिस ने बताया कि गुप्ता ने एपीके डेटा को होस्ट करने के लिए अलग-अलग कंपनियों से सर्वर किराए पर लिए थे। वह इन खतरनाक फाइलों को लोगों को ठगने वाले गिरोहों को 20,000 से 25,000 रुपये प्रति फाइल के हिसाब से बेचता था।

अधिकारी ने बताया, 'ये साइबर गिरोह बैंकों और अन्य संस्थानों से लीक हुए डेटा का इस्तेमाल करके लोगों से संपर्क करते थे। इस पूरे नेटवर्क ने पूरे भारत में 9,673 लोगों को अपना निशाना बनाया है। राष्ट्रीय साइबर पोर्टल '130' पर 1,074 शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें से 142 शिकायतें महाराष्ट्र से और 36 अकेले मुंबई से हैं।'


गुप्ता द्वारा बनाए गए इस खतरनाक सॉफ्टवेयर की मदद से पीड़ितों के साथ कुल मिलाकर लगभग 150 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। अधिकारी ने आगे बताया कि इस नेटवर्क और इसके लिए काम करने वाले लोगों के बारे में अभी और जांच चल रही है।
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