महिलाओं के हाथ में मेट्रो की कमान, जानिए इससे जुड़ा खास मिथक
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लखनऊ मेट्रो का आगाज 5 सितंबर को हो गया। और लंबे समय से चला आ रहा मेट्रो का इंतजार भी खत्म हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मेट्रो का शुभारंभ किया। और इसके साथ भी मेट्रो के साथ जुड़ा एक और मिथक सामने आया।
लखनऊ मेट्रो की पहली ड्राइव की कमान भी महिला के हाथों में ही रही। सुनने में ये बात बेशक सामान्य सी लग रही हो लेकिन मेट्रो से महिलाओं का खास नाता है। क्या आप जानते हैं कि अभी तक देश के जिन शहरों में मेट्रो चली है वहां शुरूआत में स्टेयरिंग महिलाओं के हाथ में रहा है। यह भी खास इत्तेफाक है जिन शहरों में महिलाओं के हाथों मेट्रो की शुरूआत हुई वहां वहां इसका संचालन फायदे में रहा।
मेट्रो से जुड़ने वाला लखनऊ आठवां शहर बन गया है। 5 सिंतबर को जब मेट्रो में गृहमंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश के मुख्यमंत्री मेट्रो की सवारी करने पहुंचे तो मेट्रो की कमान इलाहाबाद जिले के फूलपुर की प्रतिभा चौरसिया ने संभाली हुई थी। उनका साथ दे रहे ते अभिषेक श्रीवास्तव। वैसे प्रतिभा ने मेट्रो ट्रायल के दौरान भी मेट्रो की कमान संभाली थी। प्रतिभा 3 बहनों में सबसे बड़ी हैं। प्रतिभा की मां हाउस वाइफ हैं और पापा इफ्को में सीनियर मैनेजर हैं। प्रतिभा ने बीटेक तक पढ़ाई की है।
किन-किन शहरों में महिला ने संभाली है मेट्रो की कमान
बताते चलें कि महिलाओं के हाथ में मेट्रो की कमान देने का सिलसिला दिल्ली मेट्रो से शुरू हुआ है। 2003 में तीस हजारी से इंद्रलोक के लिए दिल्ली में रफ्तार भरी थी तब दिल्ली मेट्रो की कमान मीनाक्षी शर्मा ने संभाली थी। मीनाक्षी गाजियाबाद की रहने वाली थीं उन्होंने मेट्रो ट्रेनी के रूप में ज्वाइन किया था।
चेन्नई मेट्रो की कमान भी एक महिला ड्राइवर ने ही संभाली थी। ए प्रीति ने चेन्नई मेट्रो के अलंदुर से कोयमबेदु तक पहुंचाया था। ए प्रीति ने धर्मबल पॉलिटेक्निक कॉलेज से इंजीनियरिंग से डिप्लोमा किया है। प्रीति ने डेढ साल तक मेट्रो चलाने की ट्रेनिंग ली थी।
जबिक जयपुर मेट्रो की कमान भी समय समय पर महिलाओं के हाथों में है। कुसुम कंवर जयपुर मेट्रो की पहली महिला ड्राइवर है। जयपुर मेट्रो में कुल 24 ड्राइवर हैं जिसमें 5 लड़कियां है। मेट्रो ड्राइविंग से जुड़ी इन महिलाओं की खास बात ये है कि इन महिलाओं ने कभी स्कूटी तक नहीं चलाई थी। और सभी महिलाएं छोटे कस्बो से हैं।