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85 साल बाद कैसे मिली भगत सिंह की पिस्तौल
बीबीसी हिंदी
Updated Fri, 18 May 2018 05:27 PM IST
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अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ बगावत करने वाले भगत सिंह पर कई किताबें लिखी गई, फिल्में बनी और अलग-अलग विचारधारा के लोगों ने उनपर अपने-अपने तरीके से हक भी जताया। भगत सिंह पर बनी फिल्मों में आपने अक्सर एक सीन देखा होगा जिसमें उनका किरदार निभा रहे अभिनेता अंग्रेज अफसर जॉन सॉन्डर्स को गोली मार देते हैं।
भगत सिंह और उनके साथियों से जुड़ी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी कई लोगों ने देखी होगी। लेकिन भगत सिंह से जुड़ी एक खास चीजहै जो फिल्मी परदे या फिर गाड़ियों और दीवारों पर अक्सर उनकी तस्वीर के साथ नजर आ जाती है। वो चीज है उनकी इस्तेमाल की हुई पिस्तौल।
1968 में पिस्तौल मध्य प्रदेश भेजी गई
जुपिंदरजीत कहते हैं, "यहां भी राह आसान नहीं थी। रिकॉर्ड खंगालने के बाद पता चला कि लाहौर से आए हथियारों में से साल 1968 में 8 हथियार मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित बीएसएफ के सेंट्रल स्कूल ऑफ वेपन्स एंड टैक्टिक्स भेज दिए गए थे।"
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ये तब की बात है जब भारत में बार्डर सिक्योरिटी फोर्स वजूद में आई और इंदौर में इसकी ट्रेनिंग अकादमी बनी। उस वक्त राष्ट्रपति ने सारे राज्यों को चिट्ठी लिखी थी कि इस अकादमी में प्रशिक्षण के लिए अपने-अपने राज्यों से हथियार भेजें। पंजाब से जो 8 हथियार अकादमी में गए, उनमें भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई पिस्तौल भी थी।
पिस्तौल से पेंट कुरेदकर ढूंढा गया नंबर
जुपिंदरजीत के मुताबिक इंदौर से इसकी जानकारी हासिल करना भी बहुत मुश्किल काम था। उन्होंने बताया, "बड़ी मुश्किल से बीएसएफ के आईजी पंकज से संपर्क हो सका। वो इन हथियारों के बारे में जानकारी दे सकते थे।"
उन्होंने आगे बताया कि हथियारों को जंग से बचाने के लिए पेंट करके रखा जाता था। जुपिंदर के मुताबिक, "आईजी पंकज ने पंजाब से आए हथियारों की लिस्ट उठाई और उस लिस्ट में मौजूद हथियारों से पेंट हटाना शुरू किया। तीसरा ही हथियार वो पिस्तौल था जिसकी हमें तलाश थी। भगत सिंह की पिस्तौल के नंबर से इस पिस्तौल का नंबर मैच हो गया था।"
अब समस्या ये थी कि इस पिस्तौल को पंजाब कैसे लाया जाए।
पिस्तौल के कागजात के आधार पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। इस याचिका में कहा गया कि पिस्तौल पर असल हक पंजाब का है। इसलिए इसे पंजाब के हवाले किया जाए। इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाने और अदालत के दखल के बाद पिस्तौल को पंजाब भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया।
पंजाब के हुसैनिवाला में रखी गई पिस्तौल
अब इस पिस्तौल को पंजाब के हुसैनिवाला के म्यूजियम में रखा गया है। भगत सिंह के गांव, खटकर कलां के म्यूजियम में इस पिस्तौल को इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि हुसैनिवाला की सरहद पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
अमरीका में बनी ये पिस्तौल भगत सिंह को किसने दी और किससे ले कर दी, इसके सबूत नहीं मिलते हैं। जुपिंदर ये पता लगाने की कोशिश भी कर रहे हैं। भगत सिंह की जेल डायरी दुनिया के सामने लाने वाले प्रोफेसर मालविंदरजीत सिंह वड़ैच ने भी जुपिंदरजीत की खोज को किताबी रूप देने की सराहना की है।
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भगत सिंह और उनके साथियों से जुड़ी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी कई लोगों ने देखी होगी। लेकिन भगत सिंह से जुड़ी एक खास चीजहै जो फिल्मी परदे या फिर गाड़ियों और दीवारों पर अक्सर उनकी तस्वीर के साथ नजर आ जाती है। वो चीज है उनकी इस्तेमाल की हुई पिस्तौल।
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1968 में पिस्तौल मध्य प्रदेश भेजी गई
जुपिंदरजीत कहते हैं, "यहां भी राह आसान नहीं थी। रिकॉर्ड खंगालने के बाद पता चला कि लाहौर से आए हथियारों में से साल 1968 में 8 हथियार मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित बीएसएफ के सेंट्रल स्कूल ऑफ वेपन्स एंड टैक्टिक्स भेज दिए गए थे।"
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ये तब की बात है जब भारत में बार्डर सिक्योरिटी फोर्स वजूद में आई और इंदौर में इसकी ट्रेनिंग अकादमी बनी। उस वक्त राष्ट्रपति ने सारे राज्यों को चिट्ठी लिखी थी कि इस अकादमी में प्रशिक्षण के लिए अपने-अपने राज्यों से हथियार भेजें। पंजाब से जो 8 हथियार अकादमी में गए, उनमें भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई पिस्तौल भी थी।
पिस्तौल से पेंट कुरेदकर ढूंढा गया नंबर
जुपिंदरजीत के मुताबिक इंदौर से इसकी जानकारी हासिल करना भी बहुत मुश्किल काम था। उन्होंने बताया, "बड़ी मुश्किल से बीएसएफ के आईजी पंकज से संपर्क हो सका। वो इन हथियारों के बारे में जानकारी दे सकते थे।"
उन्होंने आगे बताया कि हथियारों को जंग से बचाने के लिए पेंट करके रखा जाता था। जुपिंदर के मुताबिक, "आईजी पंकज ने पंजाब से आए हथियारों की लिस्ट उठाई और उस लिस्ट में मौजूद हथियारों से पेंट हटाना शुरू किया। तीसरा ही हथियार वो पिस्तौल था जिसकी हमें तलाश थी। भगत सिंह की पिस्तौल के नंबर से इस पिस्तौल का नंबर मैच हो गया था।"
अब समस्या ये थी कि इस पिस्तौल को पंजाब कैसे लाया जाए।
पिस्तौल के कागजात के आधार पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। इस याचिका में कहा गया कि पिस्तौल पर असल हक पंजाब का है। इसलिए इसे पंजाब के हवाले किया जाए। इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाने और अदालत के दखल के बाद पिस्तौल को पंजाब भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया।
पंजाब के हुसैनिवाला में रखी गई पिस्तौल
अब इस पिस्तौल को पंजाब के हुसैनिवाला के म्यूजियम में रखा गया है। भगत सिंह के गांव, खटकर कलां के म्यूजियम में इस पिस्तौल को इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि हुसैनिवाला की सरहद पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
अमरीका में बनी ये पिस्तौल भगत सिंह को किसने दी और किससे ले कर दी, इसके सबूत नहीं मिलते हैं। जुपिंदर ये पता लगाने की कोशिश भी कर रहे हैं। भगत सिंह की जेल डायरी दुनिया के सामने लाने वाले प्रोफेसर मालविंदरजीत सिंह वड़ैच ने भी जुपिंदरजीत की खोज को किताबी रूप देने की सराहना की है।
भगत सिंह
भगत सिंह की पिस्तौल
भगत सिंह को फांसी दिए जाने के बाद उनकी इस्तेमाल की हुई पिस्तौल कहां गई? 20वीं सदी में इस्तेमाल की गई पिस्तौल इतने साल कहां पड़ी रही और कैसे 21वीं सदी में ये लोगों के सामने आई। भगत सिंह की पिस्तौल को दुनिया के सामने लाने वाले और इस सारी जद्दोजहद पर किताब लिखने वाले पत्रकार जुपिंदरजीत ने बीबीसी से पिस्तौल की खोज के बारे में विस्तार से बात की। भगत सिंह पर आरोप था कि उन्होंने अंग्रेजअफसर सॉन्डर्स की हत्या अमरीका में बनी ।32 बोर की कौलट सैमी ऑटोमेटिक पिस्तौल से की।
पिस्तौल की खोज
जुपिंदरजीत ने चंद्रशेखर आजाद के इस्तेमाल किए हुए हथियार के बारे में अक्सर चर्चा सुनी थी। लोग उनके हथियारों के साथ सेल्फी लेते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस हथियार को अच्छे तरीके से संभाल कर रखा है।
जुपिंदरजीत कहते हैं कि उनके मन में कई साल पहले ये ख्याल आते थे कि भगत सिंह की पिस्तौल का क्या हुआ, पिस्तौल कहां गई और किसके पास है। वो बताते हैं कि 2016 में उन्होंने पिस्तौल को ढूंढना शुरू किया। काफी मेहनत के बाद वो ये जानने में कामयाब हुए कि पस्तौल को भगत सिंह की फांसी के बाद कहां भेजा गया था। 1944 में पंजाब के फिलौर ट्रेनिंग अकादमी में लाहौर से लाए गए हथियारों के कागजात
फिल्लौर पुलिस अकादमी
2016 में पिस्तौल का नंबर मिलने पर उन्हें पहली कामयाबी मिली। भगत सिंह की ओर से इस्तेमाल की गई। 32 बोर की कोल्ट सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल का नंबर है - 168896। पिस्तौल के कागजात और अपनी खोजबीन के आधार पर वो कहते हैं, "1931 में लाहौर उच्च न्यायालय ने पिस्तौल को पंजाब के फिल्लौर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में भेजने का निर्देश दिया। वो बात अलग है कि पिस्तौल को यहां पहुंचते-पहुंचते 13 साल लग गए। 1944 में ये पिस्तौल फिल्लौर लाई गई।"
पिस्तौल का नंबर तो पता चल चुका था। फिर ये भी पता चला कि पिस्तौल कहां रखी गई है। जुपिंदरजीत के मुताबिक उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में पिस्तौल को ढूंढना शुरू करवाया।
भगत सिंह को फांसी दिए जाने के बाद उनकी इस्तेमाल की हुई पिस्तौल कहां गई? 20वीं सदी में इस्तेमाल की गई पिस्तौल इतने साल कहां पड़ी रही और कैसे 21वीं सदी में ये लोगों के सामने आई। भगत सिंह की पिस्तौल को दुनिया के सामने लाने वाले और इस सारी जद्दोजहद पर किताब लिखने वाले पत्रकार जुपिंदरजीत ने बीबीसी से पिस्तौल की खोज के बारे में विस्तार से बात की। भगत सिंह पर आरोप था कि उन्होंने अंग्रेजअफसर सॉन्डर्स की हत्या अमरीका में बनी ।32 बोर की कौलट सैमी ऑटोमेटिक पिस्तौल से की।
पिस्तौल की खोज
जुपिंदरजीत ने चंद्रशेखर आजाद के इस्तेमाल किए हुए हथियार के बारे में अक्सर चर्चा सुनी थी। लोग उनके हथियारों के साथ सेल्फी लेते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस हथियार को अच्छे तरीके से संभाल कर रखा है।
जुपिंदरजीत कहते हैं कि उनके मन में कई साल पहले ये ख्याल आते थे कि भगत सिंह की पिस्तौल का क्या हुआ, पिस्तौल कहां गई और किसके पास है। वो बताते हैं कि 2016 में उन्होंने पिस्तौल को ढूंढना शुरू किया। काफी मेहनत के बाद वो ये जानने में कामयाब हुए कि पस्तौल को भगत सिंह की फांसी के बाद कहां भेजा गया था। 1944 में पंजाब के फिलौर ट्रेनिंग अकादमी में लाहौर से लाए गए हथियारों के कागजात
फिल्लौर पुलिस अकादमी
2016 में पिस्तौल का नंबर मिलने पर उन्हें पहली कामयाबी मिली। भगत सिंह की ओर से इस्तेमाल की गई। 32 बोर की कोल्ट सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल का नंबर है - 168896। पिस्तौल के कागजात और अपनी खोजबीन के आधार पर वो कहते हैं, "1931 में लाहौर उच्च न्यायालय ने पिस्तौल को पंजाब के फिल्लौर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में भेजने का निर्देश दिया। वो बात अलग है कि पिस्तौल को यहां पहुंचते-पहुंचते 13 साल लग गए। 1944 में ये पिस्तौल फिल्लौर लाई गई।"
पिस्तौल का नंबर तो पता चल चुका था। फिर ये भी पता चला कि पिस्तौल कहां रखी गई है। जुपिंदरजीत के मुताबिक उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में पिस्तौल को ढूंढना शुरू करवाया।