फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Addiction: Mobile phone addiction is killing 20,000 children every year, demanding a law from govt

Addiction: मोबाइल फोन से चिपके रहने की लत हर साल 20 हजार बच्चों की ले रही जान, सरकार से कानून बनाने की मांग

Sat, 28 Mar 2026 06:22 AM IST
Pavan अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Sat, 28 Mar 2026 06:22 AM IST
सार

Mobile Phone Addiction: मोबाइल फोन जितनी सुविधाएं हम तक पहुंचाता है, ये उतना ही हानिकारक हमारे बच्चों के लिए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन से चिपके रहने के कारण हर साल कम से कम 20 हजार बच्चे इसकी वजह से आत्महत्या कर लेते हैं।

विज्ञापन
Addiction: Mobile phone addiction is killing 20,000 children every year, demanding a law from govt
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : FreePik

विस्तार

हर समय टीवी या मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहने की लत बच्चों और किशोरों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। हर साल कम से कम 20 हजार बच्चे इसकी वजह से आत्महत्या कर लेते हैं। यह दावा तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने शुक्रवार को राज्यसभा में किया। साथ ही कहा कि सरकार को इस संकट के समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - Weather: पहाड़ पर बर्फबारी, मैदान में बारिश; पूर्वोत्तर में तेज हवा के साथ पड़ेंगे ओले, जानें मौसम का अलर्ट
विज्ञापन


68 देशों में स्कूलों में मोबाइल फोन पर प्रतिबंध
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तृणमूल सांसद ने कहा कि विभिन्न अध्ययनों से संकेत मिलता है कि बच्चे और युवा हर दिन कम से कम आठ घंटे का समय मोबाइल फोन और स्क्रीन पर बिता रहे हैं, जो साल में 100 दिनों से अधिक के बराबर है। 68 देशों ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर पहले ही प्रतिबंध लगा दिया है। अत्यधिक स्क्रीन समय नींद को बाधित करता है, चिंता के खतरे को बढ़ाता है और मूड में जल्दी बदलाव का कारण बनता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मोबाइल फोन या स्क्रीन के जरूरत के अनुसार उपयोग को बढ़ावा देना, ऑफलाइन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा डिजिटल एडिक्शन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर व्यापक संवाद शुरू करना शामिल है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बच्चों में सोशल मीडिया का उपयोग विनियमित करने के लिए कानून बने
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने बच्चों और किशोरों के बीच सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन गेम के बढ़ते उपयोग को विनियमित करने के लिए शुक्रवार को सरकार से एक कानून लाने का अनुरोध किया। उन्होंने लोकसभा में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि आजकल घंटों तक बच्चे रील, वीडियो गेम और स्क्रोलिंग में लगे रहते हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि बच्चों और किशोरों में कम उम्र में ही स्मार्ट फोन की लत लग रही है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। इससे जुड़ा एक और गंभीर विषय यह है कि युवाओं के बीच ऑनलाइन सट्टेबाजी का तेजी से प्रसार हो रहा है।

यह भी पढ़ें - जीडीपी पर पश्चिम एशिया तनाव का असर: आपूर्ति संकट से बढ़ेगी महंगाई, अनिश्चित वैश्विक माहौल में ऊर्जा सुरक्षा

लूडो जैसे खेलों में भी सट्टेबाजी सामान्य- कांग्रेस सांसद
दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एविएटर जैसे खेल में, वर्चुअल विमान से उड़ान भरने के साथ पैसे बढ़ने का लालच दिया जाता है। लूडो जैसे खेलों में भी सट्टेबाजी सामान्य चीज हो गई है। उन्होंने दावा किया कि सट्टा आधारित खेलों का फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट पर खुले आम प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा साइबर बुलिंग के कृत्य और ऑनलाइन उत्पीड़न हो रहे हैं और डाटा की गोपनीयता से जुड़े बहुत गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस सांसद ने उल्लेख किया कि विश्व के कई देशों में इसे लेकर बहुत कड़े नियम बनाए गए हैं।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed