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बागी TMC सांसदों की सदस्यता पर लटकी तलवार: ओम बिरला से क्यों मिलने पहुंचे अभिषेक बनर्जी? समझिए राजनीतिक मायने

Fri, 19 Jun 2026 05:31 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 19 Jun 2026 05:31 PM IST
सार

Abhishek Banerjee Meets Om Birla: तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने के लिए 20 अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं। बागी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय का दावा करते हुए अलग गुट की मान्यता मांगी थी, जिसे बनर्जी ने दलबदल कानून के खिलाफ बताया है।

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Abhishek Banerjee takes charge following dispute in TMC meets speaker Om Birla TMC asserts party is united
अभिषेक बनर्जी, टीएमसी सांसद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संसद के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ याचिकाएं सौंपी हैं। इन सभी याचिकाओं में बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।

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अनजान दल में विलय का दावा
अध्यक्ष से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ये 20 बागी सांसद एक कम प्रसिद्ध दल में शामिल हो गए हैं। इस दल का नाम 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) है। बनर्जी ने साफ कहा कि इन सांसदों ने अपनी मूल पार्टी छोड़ दी है। इसलिए सदन की सदस्यता से इनका पत्ता कटना तय होना चाहिए।
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अभिषेक बनर्जी ने बागी गुट पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि 20 लोगों ने पहले स्पीकर से मुलाकात की थी। उन्होंने खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। बाद में पता चला कि वे एनसीपीआई नाम के दल में शामिल हो गए हैं। बनर्जी ने दावा किया कि इस समूह का नाम आज तक किसी ने नहीं सुना है। यहां तक कि इन बागी सांसदों को भी पहले इस पार्टी के बारे में कुछ नहीं पता था।
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क्या कहता है दलबदल कानून?
टीएमसी नेता ने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दलबदल कानून बिल्कुल स्पष्ट है। अगर कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद रहने के योग्य नहीं रहता। अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा कि ये लोग टीएमसी के सिंबल पर चुनाव जीतकर आए थे। अब चुनाव के दो साल बाद वे दावा कर रहे हैं कि वे किसी नई पार्टी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में उनकी लोकसभा सदस्यता तुरंत खत्म होनी चाहिए।

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दो-तिहाई के नियम पर घेरा
अभिषेक बनर्जी ने कानूनी पेच भी समझाया। उन्होंने कहा कि किसी दूसरी पार्टी में विलय के लिए दो-तिहाई सदस्यों का नियम होता है। लेकिन यह नियम पूरी राजनीतिक पार्टी पर लागू होता है। इसे सिर्फ विधायी पार्टी (सदन के भीतर मौजूद सांसद) तक सीमित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने लोकसभा में टीएमसी नेता के तौर पर सभी 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की हैं।

यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब स्पीकर ओम बिरला ने अभिषेक बनर्जी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया था। दरअसल, बागी सांसदों ने मांग की थी कि एनसीपीआई में उनके विलय के बाद उन्हें सदन में एक अलग समूह के रूप में मान्यता दी जाए। बनर्जी ने पिछले हफ्ते भी स्पीकर को पत्र लिखा था। उन्होंने मांग की थी कि टीएमसी के किसी भी बागी गुट को कोई अलग दर्जा, मान्यता या सुविधा न दी जाए। उनका तर्क है कि दलबदल कानून किसी मौजूदा पार्टी के भीतर अलग गुट बनाने की इजाजत नहीं देता।


क्या पार्टी ने विलय के दावे को खारिज किया है?
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि टीएमसी एक ही पार्टी है और जो भी सांसद पार्टी छोड़ते हैं, उन्हें टीएमसी का हिस्सा नहीं माना जा सकता। रॉय ने कहा कि जिस तरह से पार्टी में विभाजन का दावा किया जा रहा है, वह संविधान और संसदीय नियमों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एनसीपीआई के बारे में कोई जानकारी नहीं है और इस बारे में उन्हीं सांसदों से सवाल पूछा जाना चाहिए जिन्होंने विलय का दावा किया है।

क्या सौगत रॉय ने राजनीतिक दबाव की बात कही?
सौगत रॉय ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक दलों के नेताओं को कभी प्रलोभन देकर तो कभी दबाव बनाकर अपने पक्ष में करने की कोशिश करती है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष मामले का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उनके बयान से साफ संकेत मिला कि TMC इस बगावत के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जता रही है।

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