फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   AAP vs Congress: Kejriwal can create trouble for Congress, workers considering AAP as a double-edged sword

AAP vs Congress: कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं केजरीवाल, AAP को दोधारी तलवार मान रहे कार्यकर्ता

Sun, 20 Aug 2023 05:32 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Sun, 20 Aug 2023 05:32 PM IST
विज्ञापन
सार
हिमाचल प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 43.90 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, जबकि हार के बाद भी भाजपा को 43 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। दोनों पार्टियों में एक प्रतिशत से भी कम वोटों का अंतर था।
loader
AAP vs Congress: Kejriwal can create trouble for Congress, workers considering AAP as a double-edged sword
सीएम केजरीवाल, भगवंत मान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

अरविंद केजरीवाल 20 अगस्त को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ मध्य प्रदेश के सतना पहुंचे। यहां भी उन्होंने छत्तीसगढ़ की तर्ज पर 10 बड़ी घोषणाएं कर आम आदमी पार्टी के लिए जनसमर्थन जुटाने की कोशिश की। आम आदमी पार्टी लंबे समय से राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में काम कर रही है और इन प्रदेशों में पार्टी का संगठन भी खड़ा किया जा चुका है। माना जा रहा है कि केजरीवाल की लोकप्रिय घोषणाएं कुछ क्षेत्रों में मतदाताओं को आकर्षित कर सकती हैं। 


सीटों के रूप में आम आदमी पार्टी को कितनी सफलता मिलेगी, यह कहना तो मुश्किल है लेकिन यदि कुछ सीटों पर उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को पांच-दस हजार वोट भी मिलते हैं तो कम वोटों के अंतर से होने वाली हार-जीत में उनकी पार्टी के प्रत्याशी को मिले वोट  परिणाम बदल सकते हैं। यही कारण है कि कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा से ज्यादा आम आदमी पार्टी से सतर्क रहने की बात कह रहे हैं। हिमाचल और गुजरात के अनुभव पार्टी को सतर्क रहने की चेतावनी दे रहे हैं।


'हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस को सीखने की जरूरत' 
हिमाचल प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 43.90 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, जबकि हार के बाद भी भाजपा को 43 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। दोनों पार्टियों में एक प्रतिशत से भी कम वोटों का अंतर था। यदि आम आदमी पार्टी ने बिल्कुल अंतिम समय में हिमाचल से अपने पैर वापस नहीं खींचे होते और वह थोड़ा भी अधिक वोट हासिल कर लेती तो कम अंतर से हुई हार-जीत वाली सीटों पर चुनाव परिणामों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता था और इसका असर नई सरकार पर भी पड़ सकता था। 

राजनीतिक विश्लेषक धीरेंद्र कुमार ने अमर उजाला से कहा कि आम आदमी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने अंतिम समय में भाजपा का दामन थाम लिया था और सुरजीत सिंह ठाकुर ने जून महीने में अपना पदभार संभाला था। इस स्थिति में भी आम आदमी  पार्टी ने हिमाचल प्रदेश में 1.1 प्रतिशत का वोट शेयर हासिल कर लिया। यदि आम आदमी पार्टी को सही से अपना चुनाव प्रचार करने का अवसर मिलता तो वह अधिक वोट हासिल कर सकती थी और इसका सीधा नुकसान कांग्रेस को हो सकता था। ऐसे में आगामी चुनावों में कांग्रेस को सतर्क रणनीति बनाने की आवश्यकता है।

मध्य प्रदेश में भी वोटों का अंतर कम रहा 
मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव (2018) में कांग्रेस ने 40.89 प्रतिशत वोट से 114 सीटें और भाजपा ने 41.02 प्रतिशत वोट से 109 सीटें हासिल की थीं। दोनों दलों के वोटों में आधे प्रतिशत का भी अंतर नहीं था। बसपा ने भी इस चुनाव में लगभग पांच प्रतिशत वोट प्राप्त कर लिया था। अभी जिस तरह की परिस्थितियां दिख रही हैं, मध्य प्रदेश में इस बार भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। ऐसी स्थिति में वोटों का बंटवारा बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।  

गुजरात हार में भी थी बड़ी भूमिका
आम आदमी पार्टी की उपस्थिति के कारण कांग्रेस को गुजरात में काफी सीटों का नुकसान उठाना पड़ा था। गुजरात कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि यदि आम आदमी पार्टी के कारण वोटों का बंटवारा न हुआ होता तो सूरत और वलसाड सहित कई इलाकों में कांग्रेस बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी। वह जीत भले न हासिल करती, लेकिन ऐतिहासिक रूप से सबसे कम सीटों पर निपट जाने के कलंक से वह जरूर  बच सकती थी। 

स्थिति स्पष्ट करे आलाकमान: कांग्रेस 
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इस बार भी अरविंद केजरीवाल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तैयारी कर रहे हैं। चूंकि मध्य प्रदेश और राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर हो सकती है, आम आदमी पार्टी को मिलने वाले वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं और वे कांग्रेस को कई सीटों पर नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में समय रहते यह निर्णय किया जाना चाहिए कि पार्टी को अरविंद केजरीवाल के साथ कितना और कहां आगे बढ़ना है। 

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि यदि पार्टी अरविंद केजरीवाल से विधानसभा चुनावों में कोई समझौता करती है और उसे दस भी सीटें देती है तो इससे अरविंद केजरीवाल को कांग्रेस के दम पर तीन अन्य राज्यों में पैर पसारने का अवसर मिल सकता है। यदि आम आदमी पार्टी इनमें दो-चार सीटों पर भी जीत हासिल करने में सफल रही तो वह बाद में कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। विशेषकर यह देखते हुए कि अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के वोटों में ही सेंध लगाते हैं, उनके साथ आगे बढ़ना कितना सही है, इस पर पार्टी को विचार करना चाहिए। 

दिल्ली में अभी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों पर अंतिम तालमेल नहीं बनी है। राहुल गांधी के सभी सीटों पर तैयारी करने के बयान के बाद जिस तरह दोनों दलों में भ्रम की स्थिति बनी, दोनों ही पार्टी के नेताओं ने सामने आकर उसे दूर करने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय संदर्भों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस सभी परिस्थितियों  का आकलन करने के बाद ही कोई निर्णय करना चाहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed