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76th Independence Day: पंच प्रणों के साथ विकसित भारत बनाने का संकल्प, पीएम ने खींच दी अगले 25 साल की तस्वीर
Mon, 15 Aug 2022 08:16 AM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 15 Aug 2022 08:16 AM IST
सार
पीएम मोदी ने कहा, 'आज मैं लाल किले से 130 करोड़ लोगों को आह्वान करता हूं कि आने वाले 25 साल के लिए हमें पांच प्रण पर अपने संकल्पों को केंद्रित करना होगा। हमें पंच प्रण को लेकर 2047 जब आजादी के 100 साल होंगे, आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरे करने का जिम्मा उठाकर चलना होगा।
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लालकिले की प्राचीर से पीएम मोदी का संबोधन
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी की 76 वीं वर्षगांठ पर लालकिले से पांच प्रणों का खासतौर से आह्वान किया। उन्होंने सबसे पहले प्रण के रूप में 'विकसित भारत' बनाने का संकल्प व्यक्त किया और देशवासियों से इसके लिए प्राण प्रण से जुटने का आह्वान किया।
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पीएम मोदी ने कहा, 'आज मैं लाल किले से 130 करोड़ लोगों को आह्वान करता हूं कि आने वाले 25 साल के लिए हमें पांच प्रण पर अपने संकल्पों को केंद्रित करना होगा। हमें पंच प्रण को लेकर 2047 जब आजादी के 100 साल होंगे, आजादी के दीवानों के सारे सपने पूरे करने का जिम्मा उठाकर चलना होगा। पहला प्रण- अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चले। बहुत बड़े संकल्प लेकर चलना होगा।
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पीएम ने देश के 130 करोड़ लोगों के सामने ये पंच प्रणों को देश की प्राणशक्ति करार देते हुए अगले 25 साल का खाका भी पेश किया। उन्होंने देश को तेजी से विकास के रास्ते पर ले जाने के साथ ही मानसिकता में बदलाव और एकता व एकजुटता पर जोर दिया।
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पीएम ने अपने भाषण में पांच प्रणों का जिक्र किया। ये हैं-
- विकसित भारत
- गुलामी से मुक्ति
- विरासत पर गर्व
- एकता और एकजुटता
- नागरिकों का कर्तव्य
विकसित भारत बनाने और गुलामी के खात्मे का प्रण
पीएम ने कहा कि सबसे पहलेा व बड़ा संकल्प है, विकसित भारत। दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर गुलामी का एक भी अंश न बचा रहने देना। यदि जरा भी गुलामी है तो उसको किसी भी हालत में बचने नहीं देना है। सैकड़ों सालों की गुलामी ने जो हमें जकड़कर रखा है, हमें उससे मुक्ति पानी ही होगी।
'सपने बड़े होते हैं तो पुरुषार्थ बड़ा होता है' लाल किले की प्राचीर से संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के इतने दशकों के बाद पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नजरिया बदल चुका है। समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर दुनिया खोजने लगी है। विश्व का ये बदलाव, विश्व की सोच में ये परिवर्तन 75 साल की हमारी यात्रा का परिणाम है।' तीसरे प्रण का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, 'हमें हमारी विरासत पर गर्व होना चाहिए। यही विरासत जिसने कभी भारत का स्वर्णिम काल दिया था। इस विरासत के प्रति हमें गर्व होना चाहिए। चौथे प्रण 'एकता और एकजुटता' का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने कहा '130 करोड़ देशवासियों में एकता। न कोई अपना न कोई पराया। एकता की ताकत एक भारत श्रेष्ठ भारत के सपनों के लिए हमारा चौथा प्रण है।' इसी तरह पांचवें प्रण के रूप में उन्होंने 'नागरिकों के कर्तव्य' का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नागरिकों में पीएम और सीएम भी शामिल हैं। आने वाली 25 साल के सपनों को पूरा करने के लिए एक बहुत बड़ी प्राणशक्ति है। जब सपने बड़े होते हैं। जब संकल्प बड़े होते हैं तो पुरुषार्थ भी बहुत बड़ा होता है।'