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Hindi News ›   India News ›   72 Rajya Sabha seats will vacant in 2016

जीएसटी के अलावा अन्य बिलों पर नहीं करनी होगी कांग्रेस की खुशामद

Sat, 19 Mar 2016 02:28 AM IST
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 19 Mar 2016 02:28 AM IST
सार

  • 2016 में राज्यसभा की 72 सीटें होंगी रिक्त
  • जून और जुलाई में 50 सीटों पर होगा चुनाव
  • पांच राज्यों से जुनकर आएंगे 13 सदस्य

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 72 Rajya Sabha seats will vacant in 2016
- फोटो : PTI

विस्तार

संसद में जीएसटी को छोड़कर विधेयकों को मंजूरी दिलाने के लिए इस साल के अंत तक सत्ता पक्ष को कांग्रेस की कोई खुशामद नहीं करनी होगी। 21 मार्च को पांच राज्यों से 13 राज्यसभा के चुने जाने के बाद जून-जुलाई में फिर क्रमश: 19 और 32 राज्यसभा सीटें रिक्त हो रही हैं। अगस्त में हरियाणा से एक राज्यसभा सीट खाली हो रही है। वहीं पांच राज्यसभा के मनोनीत सदस्य सरकार का बड़ा संकट हल कर देंगे।

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हालांकि इसके बाद भी जीएसटी बिल को संसद की मंजूरी दिलाने के लिए सत्ता पक्ष को कांग्रेस को साथ लेकर चलना पड़ेगा।

राज्यसभा सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार जीएसटी बिल के लिए संविधान संशोधन जरूरी होगा। इसके लिए राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत जरूरी है। एक बार संविधान संशोधन की मंजूरी मिलने के बाद सरकार लिए पास जीएसटी को पारित कराना आसान हो जाएगा। जिस तरह में रिक्त वाली सीटों की टाइम लाइन को देखते हुए सत्ता पक्ष को जीएसटी पारित करने के लिए कांग्रेस पार्टी के साथ तालमेल पर निर्भर रहना ही होगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश का भी कहना है कि बिना पार्टी के राज्यसभा में सहयोग के इसे मंजूरी दिलाना संभव नहीं है।
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2016 में रिक्त होने वाली अधिकांश सीटें हिन्दी भाषी राज्यों से हैं। यहां भाजपा की सरकारें और सत्ता पक्ष का पलड़ा भारी है। बिहार से पांच, उ.प्र. से 11, छत्तीसगढ़, पंजाब से दो-दो, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान से चार, आंध्र प्रदेश से छह, झारखंड, म.प्र. से एक-एक, कर्नाटक से चार, नागालैंड से एक, तमिलनाडु से छह सीटें रिक्त हो रही हैं।  अगस्त के महीने में एक सीट हरियाणा से रिक्त हो रही है। इन राज्यों में विधायकों की संख्या के लिहाज से इस साल रिक्त होने वाली राज्यसभा सीटों में भाजपा का पलड़ा काफी भारी है।
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ऐसे में सत्ता पक्ष सहयोगी दलों तथा अन्य सहयोगियों के साथ फ्लोर प्रबंधन के जरिए बिलों को पारित कराने में आसानी से सफल हो सकता है।  अभी की मौजूदा स्थिति में यूपीए के  जहां 91 राज्यसभा सदस्य हैं, वहीं एनडीए के 64 सदस्य हैं।  21 मार्च को नये सदस्यों के चुनकर आने तथा इनके सदन में शपथ लेने के बाद से इस संख्या में बदलाव की शुरुआत हो जाएगी।

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