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भारत की 472 साल पुरानी सबसे खाली जेल, बंद है सिर्फ एक कैदी

Tue, 17 Jul 2018 02:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 17 Jul 2018 02:48 PM IST
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472 year old prison of India, where only one inmate live

आज हम आपको भारत की ऐसी जेल के बारे में बताने जा रहे हैं जहां केवल एक ही कैदी बंद है। इस कैदी का नाम दीपक कांजी (30) है। जिसे जल्द ही एक अन्य जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। जिसके बाद ये जेल पूरी तरह से खाली रहेगी। यह जेल पुर्तगाल की कॉलोनी रहे केंद्रशासित प्रदेश दीव में स्थित है।  

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जेल में बंद कांजी 50 वर्ग मीटर के कमरे में अकेला रहता है। उसे जेल प्रशासन की ओर से टीवी, कंबल और वॉटर कंटेनर जैसी सुविधाएं प्राप्त हैं। उसकी सुरक्षा के लिए वहां अभी भी पांच जेल गार्ड, एक जेलर और एक चपरासी मौजूद हैं। वह शाम 4 से 6 बजे तक पुलिस की निगरानी में जेल से बाहर जाकर सैर भी करता है।
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गृह मंत्रालय के मुताबिक बाकी राज्यों की तुलना में दमन और दीव अपने कैदियों पर ज्यादा खर्च करते हैं। यहां प्रत्येक कैदी पर 32,000 रुपये खर्च किया जाता है। बता दें इस जेल में कुल आठ सेल हैं जो 60 कैदियों के रहने के लिहाज से बनाए गए थे।
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जेल इंचार्ज चंद्रहाल वाजा का कहना है कि कैदी की 24 घंटे निगरानी की जाती है। उसके लिए होटल से खाना मंगवाया जाता है। जेल बंद होने की बात 2013 से की जा रही है, जब भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने इसे पर्यटन स्थल बनाने के लिए गुजारिश की थी। लेकिन असली तौर पर जेल बंद होने की प्रक्रिया बीते साल से ही शुरू हो गई।

कांजी को दूसरी जेल में शिफ्ट नहीं किया जा सकता

472 year old prison of India, where only one inmate live

वाजा का कहना है कि उन्होंने जेल में और कैदी नहीं रखने का फैसला किया है। पहले यहां 7 कैदी थे जिसमें 2 महिलाएं थीं। इनमें से 4 को दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। दो की सजा पूरी हो चुकी थी और उन्हें जेल से रिहा भी कर दिया गया। लेकिन बाद में कांजी दिसंबर में दोबारा गिरफ्तार हो गया। उसने अपनी पत्नी को जहर देने की कोशिश की थी।

उसे अभी दूसरी जेल में इसलिए नहीं भेजा जा सकता क्योंकि दीव सेशंस कोर्ट में उसकी सुनवाई चल रही है। जब तक उसकी सुनवाई पूरी नहीं हो जाती तब तक उसे इसी जेल में रखा जाएगा। यदि उस पर लगे आरोप सच साबित होते हैं तो उसे दूसरी जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

जेल का आखिरी कैदी कांजी टीवी पर दूरदर्शन और आध्यात्मिक चैनल देखता है। वह गुजराती अखबार और पत्रिकाओं को भी पढ़ता है। गार्ड के साथ टहलते वक्त कांजी अपने मामले की सुनवाई और भविष्य पर चर्चा करता है।

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