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आरजीआई की रिपोर्ट: साल 2020 में हुईं 82 लाख मौतें, 45 फीसदी को नहीं मिली कोई मेडिकल मदद, 1.3 फीसदी को ही मिला इलाज

Thu, 05 May 2022 08:26 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 05 May 2022 08:26 PM IST
सार

आरजीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के दौरान कुल पंजीकृत मौतों में से लगभग 1.3 प्रतिशत ने योग्य एलोपैथिक पेशेवरों और अन्य डॉक्टरों से इलाज कराया था। 

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45 pc people who died in 2020 didn't receive any medical care: Govt data
RGI Report 2020 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार के आंकड़ों से पता चला है कि साल 2020 में भारत में मरने वाले कुल 82 लाख लोगों में से 45 प्रतिशत को मौत के समय कोई चिकित्सा सहायता नहीं मिली थी। इस वर्ष के दौरान कुल पंजीकृत मृत्यु में से केवल 1.3 प्रतिशत को एक योग्य पेशेवर से इलाज मिला था। भारत के महापंजीयक (आरजीआई) द्वारा तैयार किए गए डेटा से यह बात सामने आई है। हालांकि 2020 के लिए आरजीआई की इस रिपोर्ट 'नागरिक पंजीकरण प्रणाली पर आधारित भारत के महत्वपूर्ण आंकड़े' ने उन लोगों की संख्या नहीं बताई, जिन्होंने कोविड -19 के कारण दम तोड़ दिया। 

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45 प्रतिशत को मृत्यु के समय कोई चिकित्सा सेवा ही नहीं मिली
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में जब देश में पहली बार कोविड-19 की सूचना मिली थी, तब तक महामारी के कारण 1.48 लाख लोगों की जान चली गई थी। हालांकि यह 2021 की तुलना में काफी कम है जब 3.32 लाख लोगों की बीमारी के कारण मृत्यु हुई थी। आरजीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2020 के दौरान कुल पंजीकृत मौतों में से लगभग 1.3 प्रतिशत ने योग्य एलोपैथिक पेशेवरों और अन्य डॉक्टरों से इलाज कराया था जबकि 45 प्रतिशत को मृत्यु के समय कोई चिकित्सा सेवा ही नहीं मिली थी। 
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2019 में इलाज के अभाव में मरने वालों का अनुपात 34.5 प्रतिशत था। कुल पंजीकृत मौतों में से 28 प्रतिशत संस्थानों में हुई हैं और यह अन्य स्थानों की तुलना में अधिक है जहां से मृतक को चिकित्सा सहायता मिली थी। पंजीकृत मौतों में से लगभग 16.4 प्रतिशत मौतें संस्थानों के अलावा अन्य जगहों पर हुईं। 
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आरजीआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि मृत्यु के समय मृतक को मिले इलाज की पूरी जानकारी 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से प्राप्त हुई है। दो राज्यों महाराष्ट्र और सिक्किम ने केवल आंशिक डेटा दिया है और इसलिए डेटा को तैयार करते समय उनकी संख्या का उपयोग नहीं किया गया है। शिशु मृत्यु का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकृत शिशु मृत्यु का हिस्सा केवल 23.4 प्रतिशत है जबकि शहरी क्षेत्र में यह 76.6 प्रतिशत है।
 

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