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तीन तलाक दिया तो होगी 3 साल की जेल, सरकार शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती बिल

Sat, 02 Dec 2017 07:00 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Sat, 02 Dec 2017 07:00 AM IST
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3 year jail for triple talaq, government draft is ready
triple talaq

केंद्र सरकार ने एक बार में तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए मसौदा बिल तैयार कर लिया है, जिसके तहत तीन तलाक देना अवैध और अमान्य होगा। ऐसा करने पर पति को तीन साल की जेल और जुर्माना भी हो सकता है। तीन तलाक देना गैर जमानती और संज्ञेय अपराध होगा।

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पढ़ें: पद्मावती विवाद और तीन तलाक पर ये बोलीं मानुषी छिल्लर, देश की महिलाएं जरूर जानें 
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इस अपराध के लिए कितना जुर्माना लगेगा यह मजिस्ट्रेट तय करेंगे। सरकार यह कदम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद तीन तलाक देने के मामलों को देखते हुए उठा रही है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विधेयक का नाम मुस्लिम वुमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल है। 
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मसौदा बिल को राय के लिए राज्य सरकारों को शुक्रवार को भेजा गया है। राज्यों को तत्काल अपना जवाब देने को कहा गया है। राज्यों की राय मिलने के बाद कानून मंत्रालय मसौदे को मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने पेश करेगा। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बिल को 15 दिसंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। 

एक बार में तीन तलाक पर ही लागू होगा कानून
संसद से बिल के पारित होने के बाद यह कानून सिर्फ एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा। यह कानून पीड़िता को खुद और अपने नाबालिग बच्चों के लिए भरण-पोषण और गुजारा भत्ता के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाने की शक्ति देगा।पीड़िता नाबालिग बच्चों की कस्टडी भी मांग सकेगी। इस मामले पर मजिस्ट्रेट अंतिम फैसला लेंगे।

पढ़ें:  संसद के शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है तीन तलाक विधेयक

ये स्वरूप किए जाएंगे शामिल 
प्रस्तावित बिल में इस बात के विशेष प्रावधान किए गए हैं कि किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रॉनिक जैसे ईमेल, एसएमएस या व्हाट्सएप गैरकानूनी और अमान्य होगा।  

मंत्रियों के समूह ने किया तैयार

3 year jail for triple talaq, government draft is ready
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मसौदा बिल को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालीय समूह ने तैयार किया है। इसके अन्य सदस्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी हैं। 

जम्मू-कश्मीर को छूट
प्रस्तावित बिल के अनुसार, नया कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश पर लागू होगा। 

अभी के तलाक संबंधी कानून से किस प्रकार से अलग
सरकारी सूत्रों का कहना है कि 1986 के शाहबानो केस के बाद बना कानून तलाक के बाद के लिए था जबकि इस नए कानून से सरकार तीन तलाक को रोकना चाहती है और पीड़ित महिलाओं को न्याय देना चाहती है। ये कानून संसद से पारित होने के बाद अस्तित्व में आएगा लेकिन संसद चाहे तो इसे पहले से भी लागू कर सकती है। इससे उन महिलाओं को मदद मिलेगी जो तीन तलाक के दर्द से गुजर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 66 मामले 
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक पर रोक लगाने के बावजूद ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। इस साल कोर्ट के फैसले के पहले 177 मामले सामने आए थे जबकि आदेश के बाद 66 मामले आए हैं। एक बार में तीन तलाक के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। 

घरेलू हिंसा कानून के प्रावधान मददगार नहीं
सरकारी अधिकारी ने बताया कि घरेलू हिंसा कानून के प्रावधान एक बार में तीन तलाक के मामलों में ज्यादा मददगार साबित नहीं हो रहे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय को बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं से उत्पीड़न की शिकायत मिली हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक और मनमाना करार दिया था
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक बोलकर शादी तोड़ने पर छह माह की रोक लगा दी थी। उसने इसे असंवैधानिक, मनमाना और एक पक्षीय करार दिया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह इस पर कानून बनाए।

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